सीहोर। गुना जिले के पिपरोदा खुर्द गांव में एक साथ सात मासूम की मौत जैसी घटना सीहोर में भी कभी भी हो सकती है। खनन के बाद यहां भी खाली छोड़ दिए गड्ढे हादसों को दावत दे रहे हैं। खनिज विभाग और खननकर्ता दोनों में से कोई भी इन हादसों को लेकर सचेत नहीं है।
शहर के सटे पहाड़ी क्षेत्र में कई जगह खनन के गहरे-गहरे गड्ढों में पानी भरा है। कई जगह तो सड़क किनारे ही गहरे-गहरे गड्ढे खाली पड़े हैं। ऐसा नहीं है कि सीहोर में इन गड्ढों में मासूमों के डूबने की घटना हुई नहीं हैं। सीहोर जिले इसी साल बारिश के सीजन में कई घटनाएं हुई हैं, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया है। सामान्य बात समझकर अभी तक इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया है। जबकि खनिज विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि खनन के बाद ठेकेदार खदान पर बोर्ड लगाने के साथ सुरक्षा की दृष्टि से तार फैंसिंग करेगा, लेकिन एक भी जगह ठेकेदारों ने सुरक्षा की दृष्टि से खनन के गड्ढे के आसपास फैंसिंग नहीं की है। ठेकेदारों की इस लापरवाही पर खनिज विभाग के अफसरों ने भी कोई कार्रवाई नहीं की है। नतीजा बार-बार खनन के गड्ढे में बच्चों के डूबने की घटनाएं हो रही हैं।
हर साल होती हैं डूबने से मासूमों की मौत
हर साल बारिश की सीजन में खदान के गड्ढों डूबने से मासूमों की मौत की घटना होती है। अंचल में पिछले साल भी करीब 8 बच्चे अलग-अलग घटनाओं में मौत का शिकर हुए थे। हर साल एक के बाद एक घटना होने पर भी खनिज विभाग इस दिशा में सख्ती से कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है और ठेकेदार खुद अपनी तरफ से कोई पहल नहीं कर रहे हैं।
- इस महीने खनन के गड्ढे में कई डूबे
8 सितंबर को आष्टा के भाड़ाखेड़ी गांव में क्रेशर मशीन के गड्ढे में डूबने से 25 वर्षीय अज्ञात युवक की मौत हो गई। इस युवक की शिनाख्त अभी तक नहीं हो पाई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
9 सितंबर को सीहोर के अमरोद गांव में खादन के गड्ढे में डूबने से 14 वर्षीय शफीक पुत्र सलमान खान की मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। यहां भी खदान के गड़्ढे पर सुरक्षा की दृष्टि से कोई इंतजाम ठेकेदार द्वारा अभी तक नहीं किए गए हैं। 23 सितंबर को ब्रिजिसनगर में 12 वर्षीय बालिका चंदा पुत्री श्यामलाल मालवीय की मौत हो गई। बालिका खेलते-खेतले खदान के गड्ढे के पास पहुंच गई थी।