
सीहोर। गरीबों को सस्ते दाम में भरपेट भोजन मुहैया कराने प्रदेश सरकार की दीनदयाल योजना बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। योजना में हर महीने करीब बीस हजार लोगों को खाना परोसा जा रहा है। दानदाताओं के नहीं मिलने के कारण इसका संचालन करने वालों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। यही हाल रहा तो दीनदयाल योजना एक सप्ताह मेंं बंद हो जाएगी।
प्रदेश सरकार ने सात अप्रैल 2017 से शहर के बस स्टैंड पर दीनदयाल योजना शुरू की है। योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और आमजन को पांच रुपए में भरपेट भोजन उपलब्ध कराना है। योजना शुरूआत में तो अच्छी चली, लेकिन दानतादाओं के आगे नहीं आने से ठंडे बस्ते में चली गई है।
नपा और प्रशासन ने भी इसे ठीक से चलाने की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। योजना में अनुमान के मुताबिक पांच सौ से अधिक लोग प्रतिदिन खाना खाकर अपनी भूख मिटा रहे हैंं। बता दे कि योजना की शुरूआत में लगा था कि इस पुण्य के काम में दानदाता भी आगे आएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। कुछ लोगों ने ही दान दिया है।
सात माह में एक लाख 32 हजार हितग्राही ने खाया सस्ता खाना
जानकारी के अनुसार शहर में योजना शुरू होने के बाद 228 दिन करीब सात माह में एक लाख 32 हजार 363 हितग्राहियों ने योजना के तहत भोजन किया है। योजना में दानदाताओं ने राशि नहीं मिली तो गरीबों को भोजन मिलना मुश्किल हो जाएगा। ज्ञात रहे कि जिन लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं वही लोग यहां आकर भोजन करते हैं। इसमें अधिकांश गरीब रहते हैं।
शहर सहित दूर दराज से आने वाले लोग भूख लगने पर बस स्टैंड स्थित दीनदयाल योजना का खाना खाने आते हैं। इस महत्वपूर्ण योजना को ही ठीक तरह से संचालित करने में जिम्मेेदारों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ऐसे में योजना बंद हुई तो समझा जा सकता है कि गरीबों के सामने कितनी बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। उनके सामने जब से यह बात आई है, चेहरे पर मायूसी छा गई है। गरीबों ने बताया कि उनके लिए योजना ही भोजन करने का अंतिम सहारा है। इतने रुपए नहीं कि किसी दूसरी होटल में जाकर भोजन कर सकें।
ठेकेदार ने शिकायत करते हुए कहा 30 से 35 रुपए आता है खर्च
दीनदयाल योजना अन्त्योदय योजना के संचालनकर्ता प्रदीप शर्मा ने कलेक्टर तरूण पिथौड़े और नपा सीएमओ सुधीर कुमार सिंह को इसके संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें बताया कि दीनदयाल योजना का संचालन कार्य कर के पांच रुपए में प्रति थाली भोजन प्रदान कर रहा है। योजना शुरू होनेे से लेकर अभीतक सिर्फ पांच लाख 30 हजार 115 रुपए का भुगतान किया गया है। जबकि एक थाली का खर्च 30 से 35 रुपए के करीब आता है। प्रति थाली लागत और आमदानी अंतर का भुगतान किया जाए। उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि सात दिन में राशि नहीं मिली तो योजना के तहत खाना खिलाना बंद कर देंगे।
इनका कहना है
नपा से संचालनकर्ता का अनुबंध हुआ था। अनुबंध के तहत हमारी तरफ से एक रुपए किलो गेहूं और चावल उपलब्ध कराया जा रहा है। दानदाताओं के आगे नहीं आने से संचालनकर्ता को दिक्कत आ रही है। कलेक्टर साहब के माध्यम से जरूर पचास हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने की बात कहीं है।
सुधीर कुमार सिंह, सीएमओ नगर पालिका
Published on:
22 Nov 2017 12:51 pm
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