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‘तुम्हारा किचन ठीक नहीं है, बीमार करने वाला खाना दे रहे हो’

कलेक्टर ने जिला अस्पताल का किया निरीक्षण, मरीजों से पूछा- इलाज का पैसा तो नहीं लिया

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'तुम्हारा किचन ठीक नहीं है, बीमार करने वाला खाना दे रहे हो'

सीहोर. कलेक्टर गणेश शंकर मिश्रा ने बुधवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों से बात की और व्यवस्थाएं देखीं। जिला अस्पताल की किचन देख कलेक्टर मिश्रा ने सिविल सर्जन (सीएस) भरत आर्य से कहा कि 'तुम्हारा किचन ठीक नहीं है, मरीजों को बीमार करने वाला खाना दे रहे हो।Ó कलेक्टर मिश्रा ने एक अप्रैल से मरीजों को खाना वितरण करने का काम निजी एजेंसी को देने की बात कही है। कलेक्टर ने जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों से भी बात की। बातचीत के दौरान मरीजों से पूछा इलाज करने का पैसा तो नहीं लिया जा रहा है।

अस्पताल का निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने कहा हमारा उद्देश्य मौजूदा संसाधन में अच्छी सेवाएं उपलब्ध कराना है। अस्पताल में कुछ कमियां हैं, जिन्हें जल्द ही दूर किया जाएगा। जिला अस्पताल का जायजा लेते हुए कलेक्टर मिश्रा ने सीएमएचओ प्रभाकर तिवारी और सिविल सर्जन भरत आर्य को निर्देश दिए कि ओपीडी एक जगह शिफ्ट की जाए, सभी डॉक्टर्स एक जगह बैठने चाहिए। डॉक्टर्स के पहली और दूसरी मंजिल पर बैठने के कारण मरीजों को परेशानी होती है, ओपीडी में बैठने वाले सभी डॉक्टर्स के लिए दूसरी मंजिल पर अलग-अलग कक्ष आवंटित किए जाए।

सीएस बोले- वार्ड बॉय ने भर्ती कर लिया
कलेक्टर गणेश शंकर मिश्रा ने जिला अस्पताल के महिला वार्ड का निरीक्षण करते हुए भर्ती मरीज पवित्रा मालवीय से बात की। कलेक्टर ने महिला मरीज से उसकी बीमारी के बारे में पूछा। महिला ने बताया पेट में गठान है, सर्जरी होना है। कलेक्टर मिश्रा ने सिविल सर्जन भरत आर्य से पूछा कि इसे यहां क्यों भर्ती कर लिया, राज्य बीमारी सहायता से ऑपरेशन कराना था। कलेक्टर का तर्क सुन सीएस आर्य पहले तो चुप रह गए और फिर धीरे से बोले- वार्ड बॉय ने भर्ती कर लिया। कलेक्टर ने इस पर आर्य से काफी सवाल-जबाव किए।

मेरे लौटकर आने से पहले महिलाएं बैड पर शिफ्ट हो जाएं
ट्रामा सेंटर के बाद कलेक्टर ने मेटरनिटी विंग का निरीक्षण किया, यहां पर एसएनसीयू के बाहर नवजात शिशुओं की मां जमीन पर गैलरी में लेटी मिलीं। कलेक्टर ने महिलाओं से बात की और सिविल सर्जन से इनके जमीन पर पड़े होने का कारण पूछा। सीएस ने कहा कि बैड नहीं है, एक-एक बैड पर दो-दो मरीज भर्ती हैं, हम दूसरी मंजिल पर एक हॉल में कुछ बैड इनके लिए तैयार करा रहे हैं। कलेक्टर ने देरी का कारण पूछा, जिस पर सीएस आर्य ने कहा कि परमिशन लेना है, कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा कि मैं परमिशन देता हूं, मेरे लौटकर आने से पहले सभी महिलाएं बैड पर शिफ्ट होना चाहिए।

अभी बैठक बुलाकर दुकानों को किराया रिवाइज करो
कलेक्टर ने पुराने अस्पताल भवन का भी जायजा लिया। यहां पर एक साइड में करीब 36 दुकान बनी हुई हैं। यह सभी दुकान 1100 से 1300 रुपए प्रति महीने के हिसाब से किराए पर लगी है। दुकानों से मिलने वाला किराया रोगी कल्याण समिति में जमा होता है। कलेक्टर ने सीएमएचओ को तत्काल बैठक बुलाकर दुकानों का किराया रिवाइज करने के आदेश दिए। यह दुकान साल 2003 में एक से डेढ़ लाख रुपए में आवंटित की गई थीं। हर तीन साल में 10 प्रतिशत किराया बढ़ाने का प्रावधान है। अफसरों ने कलेक्टर को बताया कि पांच दुकानदार ऐसे हैं तो बीते तीन साल से किराया भी जमा नहीं कर रहे हैं। इन दुकानदारों के बारे में एसडीएम को भी पत्र लिखा जा चुका है।

अवैध लैब में शाम तक डाल दो ताला
कलेक्टर ने जिला अस्पताल का निरीक्षण करते हुए सीएमएचओ और सीएस को आदेश दिए कि शहर में अवैध रूप से संचालित पौथोलॉजी लैब और एक्सरा सेंटर पर शाम तक ताला डल जाना चाहिए। अवैध रूप से एक भी लैब संचालित नहीं होनी चाहिए, हालांकि कलेक्टर के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग की तरफ से शहर में अवैध पौथोलॉजी बंद कराने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।