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वेतन नहीं मिलने से 108 एंबुलेंस के थमे पहिए, कर्मचारियों ने ऐसे जताया विरोध…

इमरजेंसी में मरीजों की होती रही परेशानी, 108 के 80 कर्मचारियों ने 15 वाहनों के थामे पहिए, खोला कंपनी के खिलाफ मोर्चा  

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सीहोर। 108 की इमरजेंसी सेवा नहीं मिलने से मरीज और परिजन परेशान होते रहे, स्वास्थ सेवाएं भी बदहाल नजर आई। 108 कर्मचारियों को दो माह का वेतन नहीं मिलने के करण कर्मचारियों ने सेवा को ठप कर दिया। लोकेशन मोबाइल के बंद कर देने से एक भी काल कर्मचारियों ने अटेंड नहीं किए। जिसके कारण अस्पताल व आपात स्थिति में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

जिला अस्पताल में एक भी 108 वाहन नहीं होने के कारण किसी भी मरीज को स्वास्थ सेवाएं नहीं मिली। जिसके कारण परिजन अपने मरीजों को निजी वाहन से लेकर अस्पताल पहुंचे थे। जिले में 108 एंबुलेंस के 17 वाहन है। जिन पर 70 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इन एंबुलेंस पर तैनात सभी कर्मचारी वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल पर रहे। लोकेशन नम्बर बंद कर देने से जिले में एक भी मरीज को 108 की सेवाएं नहीं मिली। 108 कर्मचारी राम परमार ने बताया कि जेडएचएल कम्पनी ने पिछले दो माह से वेतन नहीं दिया है। वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पढ़ रहा है। जिसको लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया था। मगर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया। जिसके चलते जिले के सभी 108 वाहनों के पहिए थम गए हैं। वेतन और सुविधाएं नहीं मिलने तक हड़ताल जारी रहेगी।

कम्पनी के मोबाइल में रिचार्ज तक नहीं

जिगित्सा हेल्थ केयर कंपनी द्वारा दिए गए मोबाइल में रिचार्ज तक नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण लोकेशन पर पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वही डीजल सहित अन्य सामान भी कंपनी नहीं दे रही है। जिसके कारण 108 की सेवाएं बदहाल हो गई है।

दवाइयों का भी नहीं है पता

कर्मचारियों की माने तो 21 अक्टूबर 2016 से जिगित्सा हेल्थ केयर कम्पनी ने काम संभाला था। तब से लेकर आज तक अधिकारियों के द्वारा सामान उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। तो वही वाहनों का मेंटेनेंस भी कम्पनी नहीं करवा रही है। जिसके कारण १०८ का स्टाफ कई परेशानियों का सामना कर बदहाल सेवा को चला रहे है। वही कई बार दवाइयों के अभाव में मरीज की जान तक पर बन आती है।

जिला अस्पताल ने सरकारी एंबुलेंस से चलाया काम

स्वास्थ्य विभाग की माने तो जिला अस्पताल में तैनात सरकारी एंबुलेंस को तैनात कर दिया गया था। इसके कारण अधिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा।