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आगे चल रहा था गधा, उसके पीछे पढ़े लिखों का समूह.. जानें कारण

जब गधें की निकाली बारात तो देखने वाले हो गए अचंभित जानियों क्यों.. संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने 27 वें दिन अपनाया अनोखा तरीका

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सीहोर। आपने अभी तक इंसानों की बारात निकलते हुए देखा और सुना होगा, लेकिन शहर में शनिवार को गधे की बारात निकाली गई। यहां बारात जहां से भी निकला, उसे देखने वाले अचंभित हो गए। पहली बार ऐसा नजारा सामने आने के बाद यह चर्चा का विषय बन गया।

दरअसल संविदा स्वास्थ्यकर्मी अपनी मांगों को लेकर बाल विहार मैदान पर हड़ताल कर रहे हैं। हड़ताल के 27वें दिन शनिवार को कर्मचारियों ने नया नरीका अपनाया। एक गधे को लाकर उसकी बारात रैली के रूप में निकाली गई। उसके ऊपर बेनर टंगा हुआ था जिस पर लिखा था काम गधे से ज्यादा है, फिर भी वेतन आधा है।

त्याचारी शोषण सरकार। रैली प्रमुख मार्गो से निकाली तो उसे देखने वाले हैरान रह गए।

नारेबाजी कर जताया विरोध

तीन सप्ताह से अधिक का समय बीतने के बाद भी कर्मचारियों की अभी तक मांग पूरी नहीं हो सकी है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन वृद्धि आदि है।

इसे लेकर वह पिछले कई साल से संघर्ष कर रहेे हैं। कई बार अफसर, जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया, उसके बावजूद कुछ नहीं हो सका। इसे देखते हुए हड़ताल शुरू कर दी थी। हड़ताल के बाद से ही वह प्रतिदिन नया नरीका अपना रहे हैं।

तीन संगठन की चल रही हड़ताल

बाल विहार मैदान पर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी के साथ बहुउद्देशीय अधिकारी, कर्मचारी संघ सहित एक अन्य संगठन भी धरने पर बैठा है। बता दे कि संविदा कर्मचारियों की हड़ताल से विभागों में कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। इसका खामियाजा आमजन को उठाना पड़ रहा है।

विरोध का कारण

मध्यप्रदेश के 19 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मी आंदोलन में उतर आए हैं। इतने बड़े प्रदर्शन से न केवल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं, बल्कि राज्य सरकार भी परेशान है। मंगलवार को भोपाल स्थित अंबेडकर मैदान में प्रदेशभर से आए संविदा कर्मी एकजुट हुए।

उन्होंने सरकार द्वारा अपनाई जा रही अप्रेजल पॉलिसी को खत्म करने की मांग करते की और सरकार पर आरोप लगाया कि वो कर्मचारियों की अनदेखी कर रही है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मध्यप्रदेश के अध्यक्ष सौरभ सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपनाई जा रही दमनकारी नीतियों, अप्रेजल व पद समाप्ति के कारण संविदा कर्मचारियों और उनके परिवार पर भरण-पोषण का संकट उत्पन्न हो गया है।

अप्रेजल प्रक्रिया के नाम पर संविदा कर्मचारियों से पैसों की मांग, भ्रष्टाचार एवं महिलाओं का यौन शोषण किया जाता है। जब संविदा कर्मचारी इन मांगों का विरोध करते हैं, तो उन्हें अकारण ही नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है।

विभाग ने खत्म किए 17 पद

चौहान ने कहा कि, प्रथम नियुक्ति के दौरान चयन स्तर पर जब लिखित, प्रायोगिक स्किल टेस्ट जैसी परीक्षा ली जा चुकी है, तो प्रतिवर्ष अप्रेजल का कोई औचित्य नहीं है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 17 पद समाप्ति के नाम पर करीब 850 संविदा कर्मचारियों एवं अप्रेजल में करीब 250 कर्मचारियों, 15 जिलों में 122 सपोर्ट स्टॉफ एवं हड़ताल के कारण रीवा जिला कॉल सेंटर के चार डाटा एंट्री ऑपरेटरों को सेवा से निष्कासित कर दिया गया।