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अनोखे गणेश: यहां उल्टा स्वास्तिक बनाने से सीधे हो जाते हैं बिगड़े काम

sehore ganesh mandir: भोपाल से 36 किलोमीटर दूर स्थित सीहोर में यह मंदिर है। सीहोर शहर में शूगर फैक्ट्री से पश्चिम दिशा में करीब एक किलोमीटर दूर स्थित गोपालपुर में यह प्राचीन मंदिर है।

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सीहोर

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Manish Geete

Sep 04, 2024

sehore ganesh mandir

sehore ganesh mandir: देश का ऐसा अनोखा गणेश मंदिर है, जहां पहुंचने वालों की चिंता तो दूर होती ही है, उल्टी परिक्रमा करने वालों के काम भी सीधे हो जाते हैं। विक्रमादित्य काल का यह प्राचीन मंदिर है, जहां स्वयं-भू गणेश प्रतिमा अपने चमत्कारों के लिए काफी चर्चित है। यह मंदिर वायव्य पश्चिम-उत्तर कोण पर स्थित है।

भोपाल से 36 किलोमीटर दूर स्थित सीहोर में यह मंदिर है। सीहोर शहर में शूगर फैक्ट्री से पश्चिम दिशा में करीब एक किलोमीटर दूर स्थित गोपालपुर में यह प्राचीन मंदिर है। दो हजार साल पहले उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य परमार वंश के राजा ने मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर में स्थापित श्रीगणेश जी की मूर्ति खड़ी हुई है। मूर्ति जमीन के अंदर आधी धंसी हुई है, इसलिए आधी मूर्ति के ही दर्शन होते हैं। इस मंदिर का निर्माण विक्रम संवत् 155 में महाराज विक्रमादित्य द्वारा गणेशजी के मंदिर का निर्माण श्रीयंत्र के अनुरूप करवाया था।

राजा विक्रमादित्य के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार और सभा मंडप का निर्माण बाजीराव पेशवा प्रथम ने करवाया था। शालीवाहन शक, राजा भोज, कृष्ण राय तथा गौंड राजा नवल शाह आदि ने मंदिर की व्यवस्था में सहयोग किया था। नानाजी पेशवा विठूर आदि के काल में मंदिर की ख्याति और प्रतिष्ठा दूर-दूर तक फैली थी।

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150 साल पहने नहीं लगता था ताला

चिंतामन सिद्ध गणेश जी होने से और 84 सिद्धों में से अनेक तपस्वियों ने यहां सिद्धि प्राप्त की है। गणेशजी के मंदिर में विराजित गणेशजी की प्रतिमा की आंखों में हीरे जड़े हुए थे। 150 वर्ष पूर्व तक मंदिर में ताला नहीं लगाया जाता था, तब चोरों ने मूर्ति की आंखों में लगे हीरे चोरी कर लिए गए थे।

इसके बाद गणेशजी की प्रतिमा की आंखों में से 21 दिन तक दूध की धारा बहने लगी थी। तब भगवान गणेशजी ने पुजारी को सपना देकर कहा कि में खंडित नहीं हुआ हूं। तुम मेरी आंखों में चांदी के नेत्र लगवा दो। तभी से भगवान गणेश की आंखों में चांदी के नेत्र लगे हुए हैं। तब विशाल यज्ञ का आयोजन भी कराया गया था। इसके बाद श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ने लगी।

चतुर्थी पर लगता है मेला

गणेशजी के जन्म उत्सव (ganesh chaturthi) के उपलक्ष्य में यहां तभी से मेला भी लगाया जाता है। ऐतिहासिक चिंतामन गणेश मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।

उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं

मान्यता अनुसार श्रद्धालु भगवान गणेश के सामने अरदास लगाकर मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं और मन्नत पूर्ण होने के पश्चात सीधा स्वास्तिक बनाते हैं। चिंतामन गणेश मंदिर पर प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी के दौरान 10 दिवसीय मेला भी लगता है।

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