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प्रदेश का पहला विकसित प्रशिक्षण केंद्र बनेगा सीहोर का डाइट

वेस्टेज मटेरियल को रिसाइकिल कर पेपर बनाने, पानी-बिजली बचत पर होगा काम

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सीहोर

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Anil Kumar

Jan 01, 2020

प्रोजेक्ट

प्रोजेक्ट

सीहोर से अनिल कुमार की रिपोट
प्रदेश का पहला जिले का इछावर रोड स्थित सीहोर का डाइट (डिस्ट्रीक इंस्टीट्यूट ऑफ एज्यूकेशनल एंड ट्रैनिंग) विकसित होकर हाईटेक बनेगा। यहां वेस्टेज मटेरियल को रिसाइकिल कर पेपर बनाने, पानी, बिजली बचाकर उसका संकट दूर करने के अलावा अन्य पर कार्य किया जाएगा। इसके लिए डाइट भवन और परिसर का उपयोग किया जाएगा। इसके बारे में स्टाफ और शिक्षक को सीखाने के साथ स्वयं उनसे यह कार्य कराया जाएगा। छात्र प्रशिक्षित होकर विभिन्न स्कूलों मेंं पहुंच बच्चों और आमजन को अवगत कराएंगे। इससे बच्चों का ज्ञान तो बढ़ेगा ही साथ में गांवों में बर्बाद होने वाले पानी, बिजली पर रोक लगेगी।

एनसीईआरटी (नेशनल काउंसिल ऑफ एज्यूकेशनल रिसर्च एंड टैनिंग) दिल्ली ने पूरे मध्यप्रदेश के 51 जिलों में से सीहोर के एकमात्र डाइट को एक्शन प्लान के तहत गोद लिया है। गोद लेने का मुख्य उद्देश्य जिले में शिक्षा के साथ तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना है। इसी के तहत एनसीईआरटी की प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर डॉ. मधुलिका पटेल के नेतृत्व में डाइट में प्रयोग कर उसेेे विकसित किया जाएगा। इसमें अनुपयोगी सामग्री को उपयोगी बनाकर काम में लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त हाइटेक संसाधन बुलाएं जाएंगे।

इन पर होगा कार्य
जलसंक ट दूर करने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, वेस्ट मटेरियल को रिसाइकिल कर पेपर बनाने, बिजली समस्या दूर करने सौर उर्जा से बिजली उत्पन्न, आपदा आने पर उससे कैसे निपटा जाएं के अलावा अन्य पर कार्य किया जाएगा। यह सब डइट के शिक्षक और छात्र-छात्राओं को सीखाने के साथ उनसे कराया जाएगा। डाइट प्राचार्य की माने तो इसमें आने वाले खर्च को पूरा करने जनसहयोग की मदद ली जाएगी। 26 और 27 दिसंबर को कार्यशाला आयोजित कर डीईओ, डीपीसी, डाइट स्टाफ के साथ इछावर ब्लॉक के बीइओ, बीआरसीसी, बीएसी को इसकी जानकारी दी है। 5 जनवरी से प्लान पर काम शुरू होने की बात कहीं जा रही है। डाइट में अभी 15 का स्टाफ और 190 छात्र-छात्रा शिक्षा ले रहे हैं।

क्या होगा फायदा
शिक्षा विभाग के एपीसी राकेश अग्रवाल ने बताया कि डाइट में विषय के हिसाब से ही छात्र-छात्राओं को पढ़ाया जाता है। एक्शन प्लान में शिक्षा के साथ ही विभिन्न कार्य का प्रेक्टिकली ज्ञान दिया जाएगा। ऐसे में कोर्स पूरा होने के बाद जब भी वह स्कूलों में पढ़ाने जाएंगे तो बच्चों का इसका काफी लाभ मिलेगा। जो कि अभी की स्थिति में उनको नहीं मिल रहा है।

क्यों पड़ी ऐसी जरूरत
शिक्षा विभाग के स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद ढर्रे में ज्यादा कुछ बदलाव नहीं आया है। अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि कई स्कूल के प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चों को तकनीकी ज्ञान होना तो दूर की बात जोड़-घटाव तक नहीं आता है। ऐसे में डाइट से छात्र प्रशिक्षित होकर जब स्कूल में जाएंगे

प्रोजेक्ट के तहत काम होगा
एनसीईआरटी एक्शन प्लान के तहत प्रोजेक्ट के रूप में डाइट को विकसित करेगी। इसमें कई कार्य होंगे। जिसके बारे में स्टाफ और छात्र-छात्राओं को जानकारी दी जाएगी। इससे काफी हद तक बदलाव आएगा।
रजनी मालवीय, प्राचार्य डाइट सीहोर