
श्रीमद् भागवत कथा सुनने बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु महिलाएं।
नाराज होकर इंद्र ने तेज बारिश कर गोकुल को जलमग्न कर दिया।
सीहोर. परमात्मा अहंकार सहन नहीं करते। देवराज इंद्र को अहंकार हो गया था। उनके अभिमान को तोडऩे के लिए परमात्मा ने इंद्र के स्थान पर गोवर्धन की पूजा करने के लिए गोकुलवासियों से कहा। इससे नाराज होकर इंद्र ने तेज बारिश कर गोकुल को जलमग्न कर दिया।
श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। इंद्र के प्रकोप से गोकुलवासियों की रक्षा करते हुए इंद्र के अभिमान को नष्ट किया। यह बात नगर में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के 5वें दिन कथावाचक जयंती किशोरी शर्मा ने गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए कही
उन्होंने आगे कहा कि गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। गाय का दूध अमृत के समान है। गाय को माता का दर्जा दिया गया है, गाय ही हमेशा रक्षा करना चाहिए। जिस घर में गाय होता है वह घर स्वर्ग के समान होता है।
भगवान श्रीकृष्ण की बाललीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि जब तक जीव प्रभु से अधिक भरोसा अपने पर या अपनों पर करता है तब तक वह कष्ट ही उठाता है। जब तक व्यक्ति अंतर मन से प्रभु को नहीं पुकारता है, तब तक वह ईश्वर से दूर ही रहता है। परन्तु जैसे ही वह सच्चे मन से जगत से हट कर भगवान श्री कृष्ण को पुकारता है प्रभु उसी क्षण उसके कष्टों का निवारण कर देते हैं।
परमात्मा तो सभी प्राणी के लिए कल्याणकारी और सभी के रक्षक हैं। यह तो प्राणी की पुकार पर निर्भर करता है। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाललीलाओं के माध्यम से यह संदेश दिया है कि इस कलियुग में भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ है। आगे कहा कि 84 लाख योनियां भुगतने के पश्चात मानव देह की प्राप्ति होती है तथा स्वयं भगवान भी मानव देह को पाने की कामना रखते हैं। इसलिए इस देह का उपयोग व्यर्थ कामों में न करके जनकल्याण व ईश्वर भक्ति में समर्पित कर दें। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Published on:
10 Nov 2019 02:34 pm
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