18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

50 हजार परिवारों तक नहीं पहुंची ‘उज्जवला’

जिले में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना का हाल। जिन्हें कनेक्शन चाहिए उनके नाम नहीं, जिनके नाम हैं वे मिल नहीं रहे।

3 min read
Google source verification
ujjwala

Ujjwal did not reach 50 thousand families

सीहोर। गरीबों के घर में चूल्हे जल रहे है, चूल्हों से निकलती राख और धुआं महिलाओं को बीमार कर रहा है। जिले के 50 हजार से अधिक परिवार तक उज्जवला योजना नहीं पहुंचीं है। यह आंकड़ा 2011 की बीपीएल सूची का है। वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक है। जिले में अनेक गरीब परिवार के लिए प्रधानमंत्री की ‘उज्जवला’ स्कीम सुनहरा सपना बनी हुई है। योजना में जिन बीपीएल परिवारों को कनेक्शन चाहिए उनके नाम सूची में नहीं मिल रहे हैं। कई वीपीएल परिवार अभी भी गैस चूल्हे के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनके नाम सूची में नहीं होने से उन्हें गैस चूल्हा नहीं मिल सका है। हालात यह हैकि जिला मुख्यालय के नजदीकी गांव थूना में उज्जवला योजना नहीं पहुंच सकी है।

सैकड़ों गरीब परिवार के लोगों में उस समय होली, दीवाली जैसी खुशी देखी गई जब उन्हें केंद्र सरकार की उज्जवला योजना से गैस कनेक्शन बांटे गए, लेकिन उज्जवला योजना ने गरीब के घर उज्ज्वल नहीं हो पा रहे हैं। तेल कंपनियों को वर्ष 2011 तक की बीपीएल सूची भेजी थी। इस सूची के आधार पर एजेंसियों को बीपीएल परिवार तलाशने को कहा गया था। इसमें ६ साल में बदलाव हो चुका है, इससे 2011 की सूची में शामिल परिवार मिल नहीं रहे हैं। गैस कंपनियों ने बीपीएल धारकों की एक लाख २४ हजार २९० परिवार की सूची भेजी थी। इनमें से बीपीएल धारक को कनेक्शन देना था। इनमें बीपीएल राशन कार्ड में शामिल महिला जिसकी उम्र 18 साल से ज्यादा हो, को ही कनेक्शन मिलना है। इसके अलावा परिवार के चार सदस्यों के आधार कार्ड, एक फोटो, बैंक खाते की पास बुक की फोटो कॉपी भी देनी थी। गैस एजेंसी का स्टाफ महिला का नाम सॉफ्टवेयर में सर्च करना है। यदि नाम सरकार की बीपीएल सूची में है तो महिला के केवाईसी की जांच कर कनेक्शन दे रहे हैं, लेकिन हैरत बात ये है कि कई गरीब परिवार की महिलाओं के नाम बीपीएल सूची में है, लेकिन 2011 की सूची में नाम नहीं होने से उन्हें गैस चूल्हे नहीं मिल रहा है।

थूना गांव में ही नहीं पहुंची योजना
उज्जवला योजना शुरू होने के करीब डेढ़ साल बाद भी जिला मुख्यालय के नजदीकी गांव थूना में योजना का लाभ महिलाओं को नहीं मिला है। महिलाओं को अब तक नि: शुल्क गैस कनेक्शन नहीं दिए गए है। थूना निवासी शांति बाई, रेशम बाई, रानी बाई, प्रेम बाई, रेखा बाई, सुन्दर बाई, सुनीता बाई, भागवति बाई, हीरा बाई, पवित्रा बाई, मालती बाई, जानकी बाई, गंगा बाई, सरजु बाई, छुट्टन बाई, शांता बाई सहित अन्य महिलाओं ने इसके संबंध में पिछले दिनों संयुक्त कलेक्टर आरएस राजपूत को शिकायत की थी। महिलाओं ने गैस चूल्हा कनेक्शन उपलब्ध कराकर धूल धुएं और बीमारियों से मुक्ति दिलाने की मांग की है।

आवेदन के चार माह बाद भी नहीं मिला चूल्हा
इंग्लिशपुरा निवासी संगीता पत्नी मान सिंह ने कहा कि उसका नाम गरीबी रेखा की सूची में है, वह चार माह से कई बार गैस चूल्हे के लिए चक्कर काट चुकी है, लेकिन अभी तक गैस चूल्हा नहीं मिल सका है। इसके कारण उसे मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इसी तरह माया बाईने बताया कि वह लोगों के घर खाना बनाकर परिवार चला रही है। उसे उज्जवला योजना का चूल्हा मिल चुका है, लेकिन गैस टंकी की रिफलिंग नहीं होने से कई बार परेशानी होती है। गुड्डी बाई कहती है कि उसे गैस चूल्हा तो मिल गया, लेकिन गांव में गैस सिलेंडर लाने वाला कोई नहीं है।

बीपीएल परिवारों को तलाश जा रहा है
जले में एक लाख 24 हजार 290 बीपीएल परिवार की सूची में से 90 हजार 684 परिवार ने केवायसी गैस एजेंसियों पर जमा हुए हैं।इनमें से अभी तक 74 हजार 742 परिवार के आवेदन क्लीयर हुए हैं तथा 73922 परिवार को गैस चूल्हे और कनेक्शन दिए गए हैं।विभाग का कहना कि बीपीएल परिवार को आवेदन जमा करने का कहा गया है।इसके साथ ही बीपीएल परिवार को तलाशा जा रहा है। विभाग की माने तो कुछ के पास पूर्व से ही गैस कनेक्शन हैं। कईआर्थिक रूप से काफी सक्षम हैं। इसके अलावा करीब 22 हजार बीपीएल कार्डधारी पूर्व से ही गैस कनेक्शन ले चुके हैं। इसके कारण संपूर्ण सूची के हिसाब से गैस चूल्हों का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है।

क्या है योजना
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना भारत के गरीब परिवारों की महिलाओं के चेहरों पर खुशी लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा 1 मई 2016 को शुरू की गई एक योजना है। इस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन मिलना है। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना से गरीब महिलाओं को जल्द ही मिट्टी के चूल्हे से आजादी दिलाना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खाना पकाने के लिए उपयोग में आने वाले जीवाश्म ईंधन की जगह एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देना है।