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57.9 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी

सर्वे  सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े, 34.7 बच्चों की औसतन लम्बाई कम , नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट जारी

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mithilesh dubey

May 12, 2016

chhindwara

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मिथिलेश धर दुबे. सिवनी
. स्वास्थ्य महकमा कितनी ही कवायदें क्यों न कर ले, लेकिन नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की जो रिपार्ट सामने आई है वो जमीनी हकीकत से पर्दा उठाने के लिए काफी है।


ये सर्वे रिपोर्ट 29 जनवरी 2015 से 24 जुलाई 2015 की है। स्थिति की भयावहता का अनुमान इसी से लगाया जा

सकता है कि जिले में 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में 57.9 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी से जूझ रहीं हैं जिनमें हिमोग्लोबिन

की मात्रा 12.0 जी/डीएल प्रतिशत कम निकला है। वहीं 53.3 गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं।


24.4 प्रतिशत पुरुष भी एनीमिया के गिरफ्त में हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी की रिपोर्ट में सर्वे का आधार जिले के 922 घर रहे। लगभग सात महीने तक ये सर्वे किया गया। जिनमें 159 पुरुष और 1109 महिलाओं को शामिल किया गया।


ये आंकड़े भी चिंताजनक
..

परेशानी
बढ़ रहा मोटापा:
अनियमित खानपान का असर पुरुष और महिलाओं, दोनों पर पड़ रहा है। जिले में मोटापा और वजन तेजी से बढ़ रहा है। 8.7 प्रतिशत महिलाएं जहां मोटापा की शिकार है वहीं 15.2 प्रतिशत पुरुष भी बढ़ते वजन के चपेट हैं।


नहीं मिल रहा पोषक तत्व:
32.4 प्रतिशत महिलाएं और 23.5 प्रतिशत पुरुषों में मास बॉडी इेंडेक्स सामान्य से 18.5 केजी कम है। 43.8 प्रतिशत बच्चों (पांच वर्ष तक) का वजन उम्र के हिसाब बहुत कम है। इसका मतलब ये है कि लोगों को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पा रहा। गिरते सेहत का एक कारण ये भी है।


शिक्षा

62.5 प्रतिशत महिलाएं शिक्षित
: जिले में 62.5 महिलाएं तो पुरुष 75.3 प्रतिशत शिक्षित हैं। 16.3 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 वर्ष से पहले ही हो गई। 15 से 19 वर्ष के बीच गर्भवती महिलाओं की संख्या 3.8 प्रतिशत है।



सात महीने चला सर्वे
: 29 जनवरी से 24 जुलाई 2015 तक चले इस सर्वे को पूरा करने में सात महीने का वक्त लगा। सर्वे का काम एएमएस (एकेडमी मैनेजमेंट स्टडीज) और इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च (आईआईएचएमआर) ने किया। सर्वे में 70 प्रतिशत ग्रामीणों क्षेत्रों को शामिल किया गया। 15 से 49 वर्ष के आयु के लोगों को इस सर्वे में शामिल किया गया।


73.4 प्रतिशत को जननी सुरक्षा का लाभ

गर्भवती महिलाओं के लिए बनी योजना जननी सुरक्षा का लाभ भी सभी मांओं को नहीं मिल पा रहा है। 73.4 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं ही ऐसी हैं जिन्हे इस योजना का लाभ मिल पा रहा है। जबकि जिले में प्रति प्रसव पर आने वाले खर्च की बात करें तो बेहद कम 688 रुपए है। 39.9 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं ऐसी हैं जिन्हे आयरन फॉलिक एसिड का डोज 100 दिनों का दिया गया है। इसी तरह महिलाओं संबंधित स्वास्थ्य, शिक्षा सहित खाने-पीने के मामलों में भी सर्वे किया गया है।


बच्चों की स्थिति भी दयनीय

जारी रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति बच्चों की है। जिले में छह से 59 महीने के 63.3 प्रतिशत बच्चों को जहां एनीमिया है तो वहीं पांच साल तक के बच्चों की उम्र के हिसाब से लम्बाई 33.6 प्रतिशत कम है। लाख जागरुकता कार्यक्रम करने के बावजूद जन्म लेने के एक घंटे के अंदर 52.9 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिन्हे मां का पहला दूध नहीं पीलाया जा पा रहा है।