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सिवनी. प्रतिवर्ष वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि अक्षय तृतीया में किए जाने वाले प्राय: सभी कार्य सिद्धि दायक होते हैं। अक्षय का अर्थ होता है जिसका कभी क्षय ना हो, जिसका कभी नाश ना हो। सभी शास्त्रों में अक्षय तृतीया का महत्व बताया गया है। यह बात पं. राकेश मिश्रा ने कही।
उन्होंने कहा कि सभी शास्त्रों तथा भारतीय संस्कृति की परंपराओं में युगों युगों से अक्षय तृतीया पर्व बड़े ही लगन एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है। शास्त्रों में बारंबार अक्षय तृतीया का विशेष महत्व बताया गया है। इस वर्ष अक्षय तृतीया पर्व में तृतीया तिथि शनिवार को सुबह 7.49 बजे से प्रारंभ होकर पूरे दिन एवं पूरी रात रहेगी। रविवार को दूसरे दिन सुबह 7.48 बजे तक विद्यमान रहेगी उसके बाद चतुर्थी तिथि का समावेश होगा।
कहा कि कृतिका नक्षत्र सूर्योदय से लेकर रात्रि 10.24 बजे तक रहेगी। उसके बाद रोहिणी नक्षत्र का आगमन होगा जो शनिवार को शेष रात्रिभर रहकर दूसरे दिन रविवार को दिनभर एवं रात्रि 12.१6 बजे तक विद्यमान रहेगा क्योंकि 22 अप्रैल को सूर्योदय के समय द्वितीया तिथि रहेगी जो सुबह 7.49 बजे समाप्त हो जावेगी। शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि अक्षय तृतीया पर यदि रोहिणी नक्षत्र हो तो उसका फल हजारों गुना अधिक होता है।
अक्षय तृतीया पर्व के शुभ मुहूर्त
शास्त्रों में बताया गया है कि अक्षय तृतीया तिथि पर पूरे दिन शुभ मुहूर्त होता है, लेकिन उसमें भी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त दोपहर 11.45 बजे से दोपहर 12.36 बजे तक कुल 51 मिनट अभिजीत मुहूर्त में। रविवार को अक्षय तृतीया पर्व की विशेष शुभ मुहूर्त सुबह सूर्योदय 5.46 बजे से सुबह 7.48 बजे तक श्रेष्ठ है। दोपहर 11.44 बजे से दोपहर 12.36 बजे तक (कुल 52 मिनट) अभिजीत मुहूर्त में।
Published on:
20 Apr 2023 10:20 pm
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