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सिवनी

bitiya@work : दफ्तर पहुंचकर बेटियों ने जाना काम, बोली आसान नहीं पापा कार्य

- डीपी चतुर्वेदी महाविद्यालय बंद रखकर प्रबंधक ने दी छात्राओं को छुट्टी

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सिवनी. बदलते समय के साथ बेटियां तेजी से आगे बढ़ रही है। समाज के हर कार्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर बेटियों ने अपनी ताकत का अहसास कराया है। राजनीति के शीर्ष पदों पर कब्जा करने के साथ ही खेल की बुलंदियों पर बेटियों ने झंडा गाड़ा है।

ट्रेन चलाने और प्लेन उड़ाने से लेकर सेना के जिम्मेदार पदों पर परचम लहराकर बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि उनमें सबकुछ करने की क्षमता है।


स्कूल व कॉलेज में पढऩे वाली बेटियों ने ‘पत्रिकाÓ संस्थापक कर्पूर चंद कुलिश की जयंती पर सोमवार को आयोजित ‘बिटिया इन आफिसÓ से जुड़कर पिता के कार्य स्थल पर पहुंची। उनके काम को जाना और समझा। बेटियों ने कहा कि पापा का कार्य आसान नहीं है। इस अवसर पर डीपी चतुर्वेदी महाविद्यालय बंद रखकर प्रबंधक डॉ. केके चतुर्वेदी ने छात्राओं को छुट्टी दी। बीएड, बीकॉम की छात्राएं अवकाश पर रहकर पूरे दिन पापा के कार्य स्थल पर उनके कार्यों को समझने के साथ ही उसमें हाथ बंटाया।


पिता के कार्यालय पहुंची निधि
नाम – निधि त्रिवेदी, असिस्टेंट प्रोफेसर डीपी चतुर्वेदी महाविद्यालय।
पिता – मनोज मर्दन त्रिवेदी, मीडिया प्रभारी भाजपा।
– पिता के कार्यालय पहुंचकर मैंन उनके कार्य को जाना है। उनका कार्य जिम्मेदारी वाला है। मैं अपने जीवन में उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज को नई दिशा देने का कार्य करुंगी।
– निधि त्रिवेदी, असिस्टेंट प्रोफेसर डीपी चतुर्वेदी महाविद्यालय।


पिता के कार्यालय में कार्य समझती आदिती खरे
नाम – आदिती खरे, छात्रा बी-कॉम फस्र्ट सेमेस्टर।
पिता – भरत कुमार खरे, लिपिक खाद्य एवं औषधि विभाग।
– मैने अपने पिता के कार्य को जाना है। मैं इनके कार्य से काफी प्रभावित हुई हूं। मैं बड़ी होकर अपने पिता की तरह कार्य करुंगी। किसी को शिकायत का मौका नहीं दूंगी।
– आदिती खरे, छात्रा बी-कॉम फस्र्ट सेमेस्टर


पुलिस लाइन में पिता के कार्य को समझती मीना
नाम – मीना कुमरे, बीएड द्वितीय वर्ष
पिता – सुखराम कुमरे, सैनिक होमगॉर्ड
– मेरे पिता समाज में अपराध मिटाने का कार्य करते हैं। उनका कार्य काफी संवेदनशील है। मैं उनसे प्रेरित होकर समाज सुधार की दिशा में कार्य करुंगी। उनसे प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य को हासिल करुंगी।
– मीना कुमरे, बीएड द्वितीय वर्ष


पुलिस लाइन कार्यालय में पिता का कार्य समझती निशा
नाम – निशा कुमरे, बीएड द्वितीय वर्ष
पिता – चौधरी प्रसाद कुमरे, प्रधान आरक्षक
– मेरे पिता की तैनाती पुलिस लाइन में है। वे स्टोर का कार्य संभालते हैं। यह महत्वपूर्ण व जिम्मेदारी वाला कार्य है। मैंने उनके कार्य को समझा है। बड़ी होकर मैं उनके जैसे अपने कार्यों को पूरी जिम्मेदारी के साथ करुंगी।
– निशा कुमरे, बीएड द्वितीय वर्ष


दुकान पर पहुंचकर पिता का कार्य जाना अनुष्का।
नाम – अनुष्का अवस्थी, बीएड प्रथम वर्ष
पिता – विनायक अवस्थी, कारोबारी।
– दुकान पहुंचकर मैंने पिता के कार्य को समझा है। दुकान चलाना एक कठिन कार्य हैं। मैं पिता के प्रयास से ही यहां तक पहुंची हूं। भविष्य में मैं पिता का अनुसरण करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल करुंगी।
– अनुष्का अवस्थी, बीएड प्रथम वर्ष


पिता के कार्यालय में कार्य समझती अच्छिता व अर्पिता।
नाम – अर्पिता व अच्छिता।
पिता – गजेंद्र बघेल, एपीसी।
– पापा के दफ्तर पहुंचकर पिता के कार्य को जाना है। इनका कार्य स्कूलों की व्यवस्था को देखना है। यह जिम्मेदारी वाला कार्य है। हम दोनों बहने बड़ी होकर पिता के पद चिन्हों पर चलते हुए कार्य करेंगे।
– अच्छिता 5वीं व अर्पिता दूसरी की छात्रा।


पिता के कार्यालय में कार्य समझती मुस्कान
नाम – मुस्कान श्रीवास, बीएड द्वितीय वर्ष
पिता – राजकुमार श्रीवास, क्रिमिनल लॉयर
मेरे पापा सिविल कोर्ट सिवनी में क्रिमिनल लॉयर है। मैं इनके कार्य से प्रभावित हूं। पापा अपने कार्यों के बारे में मुझे बताते हैं और सहयोग लेते हैं। इनका कार्य मुझे अच्छा लगता है। मैं बड़ी होकर पापा की तरह कार्य करुंगी।
– मुस्कान श्रीवास, बीएड द्वितीय वर्ष


कंप्यूटर पर पिता के कार्य को समझती अपूर्वा।
नाम – अपूर्वा तिवारी, आठवीं
पिता – आशुतोष तिवारी, वीडियो एडिटिंग वर्क
– मैंने पापा के कार्य को जाना है। यह तकनीक से भरा कार्य है। जिम्मेदारी पूर्वक इसे किया जाता है। वीडियो एडिट करने का तरीका पापा ने मुझे बताया है। मैं बड़ी होकर पापा की तरह जिम्मेदारी से अपना कार्य करुंगी।
– अपूर्वा तिवारी, आठवीं