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सिवनी

जीवनदायिनी वैनगंगा को बीमार कर रही शहर की गंदगी

नदी में समा रही नालों की गंदगी, स्व'छता पर नहीं उठाए गए कदम

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सिवनी. जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर मुंडारा गांव के एक कुण्ड से आरम्भ हुई सिवनी जिले की जीवनदायिनी वैनगंगा नदी पर बने एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांध संजय सरोवर के पानी से हजारों किसानों के लाखों एकड़ खेत में फसलें लहलहाती हैं। इसी नदी से सिवनी, छपारा, केवलारी नगरीय क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति होती है। दशकों से इस जिले को खुशहाली देने वाली वैनगंगा नदी गुजरते समय के साथ प्रदूषण का शिकार हो रही है। वैनगंगा को स्व’छ रखने की बातें तो बहुत होती रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बहुत अ’छी नहीं है। नदी को प्रदूषण मुक्त रखने की योजना बनीं थीं, उन पर भी ब्रेक लग गया।
मप्र के सिवनी, बालाघाट से होकर महाराष्ट्र तक प्रवाहित वैनगंगा नदी अपने उद्गम से जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाती है, उस पर प्रदूषण का प्रभाव बढ़ता जाता है। इसी जिले में हालात ये हैं कि नाले-नाली का गंदा पानी और खेतों में डाली जा रही कीटनाशक, रासायनिक खाद का प्रभाव लगातार नदी को प्रदूषित कर रहा है। इसके कारण जलीय जीवों के जीवन पर भी संकट खड़ा हुआ है।
सिवनी शहर के तीन नालों से जा रही गंदगी
सिवनी शहर के तीन बड़े नाले से होकर गंदगी वैनगंगा में मिल रही है। जिसमें एक है मोतीनाला। इसमें बारापत्थर, बरघाट रोड कटंगी नाका, नागपुर रोड के कई नाली समाहित होती हैं, ये नाला आगे जाकर फरेदा के आगे बम्होड़ी में वैनगंगा नदी में मिल जाता है। दूसरा नाला बुधवारी बाजार, मंगलीपेठ, ललमटिया क्षेत्र से होकर वैनगंगा में समा जाता है। तीसरा नाला शहर के भैरोगंज क्षेत्र का है, यह भी क्षेत्र की छोटी-बड़ी नाली के साथ लोगों के घरों से निकलने वाली गंदगी को समेटते हुए वैनगंगा नदी में छोड़ता है।
छपारा के दो नाले समेट लाते हैं पूरे नगर की गंदगी
बीते वर्ष ही नगर परिषद का दर्जा हासिल कर चुके छपारा नगर में वैनगंगा को सुंदर और स्व’छ रखने के लिए परिषद ने अब तक कोई कदम नहीं उठाए हैं। जबकि छपारा नगरवासियों के घरों की नालियों से निकलने वाली गंदगी चमरा नाला और मोती नाला के जरिये वैनगंगा में समा रही है। स्थानीय रहवासी हासिम खान ने कहा कि हालात ये हैं कि कई मकानों में अब भी शौचालय का सीधा पाइप नाले में छोड़ दिया गया है, जिससे पूरी गंदगी नदी में पहुंच रही है। इतना ही नहीं वैनगंगा के नजदीक ही शराब की दुकान संचालित है। नाले में शराब पीने वाले खाली बोतल, पाउच, गंदगी छोड़ते हैं, यह भी नदी में समा रही है।
तीन दशक पहले शुरु हुआ प्रोजेक्ट बंद
वैनगंगा तट पर छपारा में तीन दशक पहले नगरीय क्षेत्र के गंदे पानी को रोकने के प्रोजेक्ट पर काम हुआ था। नाले के पानी को नदी में जाने से रोकने इंटकवेल बनाए गए थे, जिसमें नगरीय क्षेत्र के दूषित पानी को साफ कर बीज निगम के खेतों में पानी पहुंचाया जाना था। कुआं और कुछ निर्माण कार्य भी हुआ था, लेकिन यह प्रोजेक्ट ही बंद हो गया।
घट रहा जल क्षेत्र, बढ़ रहा अतिक्रमण
वैनगंगा नदी पर लगातार जल क्षेत्र में कमी हो रही है, जबकि प्रदूषण के साथ अतिक्रमण बढ़ रहा है। हालात ये हैं लगातार नदी में सिल्ट जमा हो रही है, जिसकी सफाई की ओर शासन-प्रशासन ने खास प्रयास नहीं किए। वहीं नदी के किनारे अतिक्रमण कर मकान बनाए जा रहे हैं, खेती हो रही है। मकानों की गंदगी और खेतों में डाले जा रहे कीटनाशक, फर्टीलाइजर के कारण पानी दूषित हो रहा है।
वैनगंगा समिति ने उठाई थी आवाज
वैनगंगा तट लखनवाड़ा ग्राम की मां वैनगंगा लोकशक्ति समिति के सदस्य महेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि समिति ने सिवनी शहरी क्षेत्र के नालों के गंदे पानी को वैनगंगा में जाने से रोकने तत्कालीन कलेक्टर भरत यादव को पत्र लिखा और प्रत्यक्ष भी मांग की थी। जिसके बाद मोतीनाला में दो जगह स्टॉपेज बनाए गए थे, ताकि नाले का कचरा और गंदगी कम हो। कहा कि नदी को स्व’छ और सुंदर बनाने के लिए जो प्रयास होने चाहिए थे, वह प्रयास न तो प्रशासन ने किए और न ही नागरिकों ने इस दिशा में गंभीरता दिखाई है।
तटों पर ऐसे भी बढ़ रही गंदगी
वैनगंगा नदी के विभिन्न तटों पर न सिर्फ नाला-नाली की गंदगी बल्कि नदी में धुल रहे वाहनों, आसपास से डाले जा रहे कचरे, सेम्पू-साबुन से नहाने वालों, अस्थि विसर्जन के अलावा कई तरह की अनावश्यक सामग्री के डाले जाने के कारण भी नदी का जल प्रदूषित हो रहा है।

इनका कहना है –
नदी में जो भी नाले गंदगी लेकर आते हैं, वे सभी शहरी क्षेत्र के होते हैं। ऐसे नालों को चिन्हित करके जल जीवन मिशन के अंतर्गत उनका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजेंगे, ताकि गंदे पानी को नदी में मिलने से रोका जा सके।
क्षितिज सिंघल, कलेक्टर सिवनी