
Seoni District to be declared water scarce in march (फोटो-Patrika.com)
MP News: सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में गिरता भूजल स्तर लोगों की मुश्किल बढ़ा रहा है। बीते एक माह में विभिन्न क्षेत्र में तीन से अधिक बार ग्रामीण सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी कर चुके हैं। यह आलम तब है जब अभी गर्मी की शुरुआत भी नहीं हुई है। पिछले वर्ष शहर में ही पानी की किल्लत से लोगों को जूझना पड़ा था। इस बार भी वैसी स्थिति निर्मित होने के आसार दिखाई दे रहे हैं। गर्मी की शुरूआत से पहले कई गांव में पेयजल योजना के नलकूपों (बोरवेल) के सूखने से जल आपूर्ति बाधित हो रही हैं। ऐसे में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को आनन फानन में बोरिंग करना पड़ रहा है। हालाकि विभाग इसे गंभीर समस्या नहीं मान रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि जिले के कुछ गांव में इस तरह की समस्या आ रही है, जिससे निपटने नए बोर कराए जा रहे हैं। जिले के सभी गांव को सतही जल पर आधारित पेयजल योजनाओं से जोड़ने जल निगम के अधिकारियों को परियोजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। खास बात यह है कि गिरने जल स्तर से बंद होते बोरिंग व हैंडपंपों के कारण ग्रामीणों को न केवल दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बल्कि पेयजल जैसी मूलभूत जरूरत को पूरा करने सड़क पर आंदोलन करने विवश होना पड़ रहा है।
प्रतिदिन 15 सेमी कम हो रहा बांध का पानी संजय सरोवर भीमगढ़ बांध में 14 फरवरी को जल स्तर 511.90 मीटर तक पहुंच गया था। वहीं 27 फरवरी को 510.30 मीटर दर्ज किया गया। अधिकारियों के अनुसार प्रतिदिन 15 सेमी पानी कम हो रहा है। पिछले साल नहरों से सिंचाई के लिए अधिक पानी छोड़े जाने के कारण शहर में जलसंकट उत्पन्न हो गया था। हालाकि सिंचाई विभाग के अधिकारियों कहना है कि इस बार पेयजल के लिए पर्याप्त पानी को संग्रहित करते हुए किसानों को सिंचाई का पानी दिया जाएगा।
सिवनी, लखनादौन, बरघाट सहित जिले के अन्य विकासखंडों में भूजल की उपलब्धता अधिकाधिक गहराई में होने के कारण इसे डार्क जोन में रखा जाता है। ऐसे में गर्मी प्रारंभ होने से पहले तेजी से गिरते भूजल-स्तर ने ग्रामीणों की समस्या बढ़ा दी है। जिले में नलकूपों का बेरोकटोक खनन जारी है। कई गांव की जल स्रोत सूखने से पेयजल योजनाएं बंद होने की स्थिति में आ गई हैं। हैंडपंपों ने भी पानी देना बंद कर दिया है।
जिला मुख्यालय में पिछले साल वैनगंगा नदी का जलस्तर घटने के कारण 15 दिन तक पेयजल संकट बना रहा था। माचागोरा की पेंच परियोजना से पानी छोड़ने के बाद शहर वासियों को पानी मिल सका था। बीते कई सालों से जिले को जल अभाव ग्रस्त घोषित किया जा रहा है। पीएचई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल की तरह इस साल भी मार्च 2026 में जिले को जल अभावग्रस्त घोषित करने संबंधी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा।
भू-जल स्तर गिरने के कारण जिले के कुछ गाँव में पेयजल योजना प्रभावित हुई है। मार्च माह में जिले के जल अभावग्रस्त घोषित करने आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सतही जल पर आधारित जल निगम की योजना से जिले के 50 प्रतिशत गांव को कवर किया जा चुका है। शेष 50 प्रतिशत गांव के लिए परियोजनाएं तैयार करने के निर्देश शासन स्तर से जल निगम को जारी किए गए हैं, ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके।- नरेश कुवाल, कार्यपालन अभियंता, पीएचईडी, सिवनी (MP News)
Published on:
01 Mar 2026 11:08 am
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