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तेंदूपत्ता शाख्यकर्तन प्रशिक्षण कार्यक्रम सपन्न, दी जानकारी

यह कार्य वन विभाग के मार्गदर्शन में स्थानीय ग्रामीणों और समिति सदस्यों की सहभागिता से आयोजित किया गया।

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ग्रामीणों की आजीविका का भी प्रमुख साधन है।

सिवनी. घंसौर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम किंदरई में हाल ही में तेंदूपत्ता शाख्यकर्तन प्रशिक्षण का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्य वन विभाग के मार्गदर्शन में स्थानीय ग्रामीणों और समिति सदस्यों की सहभागिता से आयोजित किया गया। तेंदूपत्ता संग्रहण का यह कार्य न केवल वन संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका का भी प्रमुख साधन है। कार्यक्रम के दौरान तेंदूपत्ता के लाभ अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि तेंदूपत्ता वन उपज का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिससे हर वर्ष बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को रोजगार प्राप्त होता है। आगे बताया कि शाख्यकर्तन का उद्देश्य पेड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना नई कोपलों की वृद्धि को प्रोत्साहित करना है। जिससे आगामी सीजन में पत्तों की गुणवत्ता और उत्पादन में वृद्धि हो सके। इस वैज्ञानिक पद्धति से किए गए कटान से जंगलों का संतुलन बना रहता है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। एस डीओ गोपाल सिंह ने बताया कि इस वर्ष किंदरई क्षेत्र में तेंदूपत्ता उत्पादन की संभावनाएं बेहतर हैं। विभाग द्वारा संग्राहकों को निर्धारित दर पर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। शासन द्वारा घोषित पारिश्रमिक सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में जमा किया जाएगा। जिससे पारदर्शिता बनी रहे। इसके साथ ही संग्रहण कार्य में लगे श्रमिकों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि वे गुणवत्ता मानकों के अनुसार पत्तों का संग्रहण कर सकें। घंसौर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत तेंदूपत्ता की चार समिति हैं।
ग्राम किंदरई के ग्रामीणों ने भी इस कार्य में उत्साहपूर्वक भाग लिया। तेंदूपत्ता संग्रहण से प्राप्त आय से ग्रामीण परिवार अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। बच्चों की शिक्षा तथा अन्य सामाजिक कार्यों में भी इसका उपयोग होता है। इस प्रकार तेंदूपत्ता ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में कार्य करता है। वन विभाग द्वारा यह भी सुनिश्चित किया गया कि शाख्यकर्तन कार्य पूरी तरह नियमों के अनुरूप हो। अवैध कटाई या किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त निगरानी रखी गई। अधिकारी ने बताया कि जंगल हमारी अमूल्य धरोहर हैं और उनका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। तेंदूपत्ता जैसी लघु वनोपज से जहां एक ओर लोगों को रोजगार मिलता है। वहीं दूसरी ओर वन संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है।
अंत में लाभ अधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की कि वे वन विभाग के निर्देशों का पालन करें और जंगलों की सुरक्षा में सहयोग दें। सामूहिक प्रयासों से ही वन संपदा को सुरक्षित रखा जा सकता है और भविष्य की पीढिय़ों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित किया जा सकता है। कार्यक्रम में घंसौर वन परीक्षित अधिकारी आशुतोष चंद्रवंशी, पोशक अधिकारी राकेश गौर, राम सिंह अर्मेती, गोविंद सिंह बर्मन, प्रबंधक प्रभु सिंह तेकाम, अशोक डोंगरे एवं सभी वनरक्षक अधिकारी और फड़ मुंशी उपस्थित रहे।