
बचपन में मां-बाप का सिर से उठा साया, फुटाने खाकर बिताई रात, अब विदेशों में स्टेज शो
अखिलेश ठाकुर सिवनी. कभी गुरबत की जिंदगी काट रहे एहसान कुरैशी को आज दुनिया जानती है। कविता, शायरी व कॉमेडियन से प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले कुरैशी का सफर सिवनी के एक छोटे से स्टेज से शुरू हुआ और देखते ही देखते वे पूरी दुनिया में छा गए। तीन भाई, पांच बहनों में पांचवें नंबर के कुरैशी के मां-बाप का निधन बचपन में हो चुका था। उस समय वे स्कूल भी नहीं जाते थे। उनकी परवरिश दीदी-जीजा ने की। एहसान सात पीढिय़ों में पहले सख्श है, जिन्होंने अपने नाम से मकान बनाया है। वे मंगलवार को अल्प समय के लिए सिवनी पहुंचे और 'पत्रिकाÓ से मुखातिब हुए। उन्होंने संघर्षों के नींव पर खड़ी अपनी सफलता को बयां किया।
बतौर कुरैशी मेरा जन्म सिवनी में हुआ। पिता एक नामी पहलवान थे। उनकी चाय की दुकान बस स्टेशन पर थी। एक सेठ की दी गई जगह पर हम सभी साथ रहते थे। पिता दो बहनों की शादी करने के बाद दुनिया से चल बसे। शेष भाई-बहन की परवरिश बड़ी दीदी शाहीदा बेगम और जीजा मो. याकूब (दोनों का निधन हो चुका है।) ने की। जीजा रेडीमेड कपड़े बेचने का कार्य करते थे, जिससे अधिक आमदनी नहीं होती। बरसात के दिनों में जब एक-एक सप्ताह पानी गिरता था तो उस समय खाने के लाले पड़ जाते थे। हम लोग घर में कच्चे चने को भुनकर (फुटाने) खाते और दिन काटते थे। बताया कि प्राथमिक शिक्षा उर्दू प्राइमरी स्कूल। आठवीं तक की पढ़ाई वर्तमान नेताजी सुबाषचंद स्कूल। 12वीं तक उमावि भैरोगंज, स्नातक व परास्नातक पीजी कॉलेज सिवनी से हुई। एक सवाल के जवाब में बताया मेरे प्रथम गुरू रमेश श्रीवास्तव है, जिन्होंने मुझे बचपन में निखारा और स्कूल में आयोजित रामलीला में राम की भूमिका निभाने का अवसर प्रदान किया। युवा अवस्था में मैंने स्व. हैदर अली, फिरोज पंडित, सुरेंद्र शुक्ला, राजेश बैस के साथ एक टीम बनाई जो छिंदवाड़ा, मंडला, बालाघाट, नागपुर में स्टेज प्रोग्राम करते थे। नागपुर में एक आर्केस्ट्रा संचालक से संबंध बना और हमलोगों ने विदर्भ में खूब नाम कमाया। वर्ष 1984 में मुझे पीडब्लूडी में लिपिक की नौकरी मिली। वर्ष 1984 में रचना (अब जीनत) से प्रेम विवाह किया। इस दौरान टीवी पर आने के लिए मैंने बहुत ऑडिशन दिए, लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्ष 2005 में नागपुर में एक ऑडिशन था, मुझे जानने वालों ने बुलाया, लेकिन मैंने मना कर दिया। मेरी पत्नी जीनत को जब यह पता चला तो उसने कहा आप जाइए आपको सफलता जरुर मिलेगी, उसने अंतिम धक्का लगाया और मैं वर्ष 2005 में टीवी पर पहुंच गया। इसके बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। देश के साथ ही विदेशों में स्टेज प्रोग्राम कर रहा हूं। मेरे प्रशंसक मुझे राष्ट्रभक्त आर्टिस्ट कहते हैं। बड़े पर्दे पर मैंने दर्जनभर से अधिक फिल्मों में काम किया है।
प्रमुख फिल्में
हिंदी फिल्म बांबे-टू-गोवा, हरियाणवी फिल्म एक पहेली लीला, भोजपुरी फिल्म हनुमान भक्त हवलदार प्रमुख है।
हॉकी में नेशनल तक बिखेरा हैं जलवा
बहुत कम लोग जानते हैं कि एहसान कुरैशी हॉकी के नेशनल खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे हॉकी के गोलकीपर थे। वे देश में हॉकी की उपेक्षा से दु:खी है। उनका कहना है कि सटोरिए के खेल क्रिकेट को बढ़ाया दिया जा रहा है। जबकि राष्ट्रीय खेल हॉकी पिछड़ता जा रहा है। बताया कि हॉकी में उनके आदर्श मेजर ध्यानचंद रहे हैं।
नहीं करुंगा पाकिस्तान में स्टेज-शो
कुरैशी ने एक सवाल के जवाब में बताया कि वे पाकिस्तान में कभी स्टेज-शो नहीं करेंगे। अभी तक उनको पांच बार वहां से टीवी और स्टेज-शो प्रोग्राम के लिए बुलावा आ चुका है। वे पाकिस्तान को डॉक्टर, इंजीनियर नहीं बल्कि आतंकवाद पैदा करने वाला देश मानते हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान भारत के प्रति अच्छा नहीं सोचता है। मेरे लिए राष्ट्र सबसे पहले हैं। इसलिए मैं पाकिस्तान में आजीवन स्टेज-शो नहीं करुंगा।
जीनत हैं देश की ख्यातिलब्ध शायर, दर्ज है गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में नाम
सिवनी. एहसान की पत्नी जीनत ने भी देशभर में नाम कमायां हैं। वे ख्यातिलब्ध शायर हैं। उनकी तीन पुस्तक तुम्हारे लिए, सुलगती धूप व तेरी याद में प्रकाशित हो चुकी है। बतौर जीनत मेरी चौथी पुस्तक बवंडर आने वाली है। यह एक कहानी संग्रह है। जीनत वल्र्ड रिकॉर्ड मैराथन मुशायरा में 31 अक्टूबर 2018 को शामिल हुई। उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज है। जीनत को 12 दिसंबर 2018 को विक्रमशीला हिंदी विद्यापीठ उज्जैन से पुस्तक और साहित्य सृजन पर पीएचडी की उपाधि मिली है।
एक सवाल के जवाब में जीनत ने बताया कि महाकौशल में प्रतिभाओं की कमी नहीं हैं। कभी भी परिस्थितियां प्रतिभाओं को नहीं रोक सकती है। बस हौसला होना चाहिए। मैं करुंगा, मैं कर सकता हूं, मुझे करके दिखाना है। यदि यह ठान लो तो सबकुछ संभव है। उदाहरण एहसान कुरैशी हैं। इनके तो मां-बाप भी नहीं थे। एक अनाथ बच्चे ने अपना लक्ष्य तय किया और आज पूरी दुनिया उनको जानती है। आने वाली पीढ़ी को उनसे सीख लेनी चाहिए। जीनत ने सिवनी की नई शौर्या जैन की तारिफ की। कहा कि आने वाले दिनों में शौर्या भी नाम कमाएगी। यह सिवनी के लिए अच्छी खबर है।
जीनत ने इन फिल्मों में दिखाया है हूनर
बांबे-टू-गोवा, मनी बैक गैरंटी। मई में आने वाली फिल्म मैं तेरा आशिक हूं। इसमें प्रख्यात बालीवुड अभिनेत्री जीनत अमान मुख्य किरादार में है। इसके अलावा सीरियल ढाई किलो प्रेम स्टार प्लस, शाम, दाम, दंड भेद स्टार प्लस, जीत गई तो पिया मैं तोरी जीटीवी, मायावती गेक्स, मस्ती चैनल, सावधान इंडिया स्टार भारत, इंटरनेट वाला लव, सोनी आदि में प्रदर्शन किया है।
Published on:
21 May 2019 09:00 pm
बड़ी खबरें
View Allसिवनी
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
