
सिवनी. जिले की जमीन महिला-पुरुष फुटबॉल प्रतिभा की धनी रही है। यहां के 30 से अधिक खिलाडिय़ों ने ओपन कैटेगरी में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा का लोहा मनवाया है। प्रदेश टीम से संतोष ट्राफी भी खेल चुके हैं। हालांकि अब तक कोई खिलाड़ी देश के लिए नहीं खेल सका। पूर्व खिलाडिय़ों में इसका मलाल भी है।
भैरोगंज के पास फुटबॉल स्टेडियम
फुटबॉल खिलाडिय़ों के लिए वर्ष 2000 में भैरोगंज के पास फुटबॉल स्टेडियम भी बनाया गया और यहां प्रदेश का चुनिंदा कॉरपेट ग्रास ग्राउंड भी है, लेकिन एनआईएस कोच, एकेडमी की कमी एवं खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन न मिलने की वजह से वे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। सरकार से बेहतर सुविधा न मिलने की वजह से वे फुटबॉल खेल के प्रति रूचि घटती जा रही है। खिलाडिय़ों का कहना है कि जिले में फुटबॉल स्टेडियम तो है, लेकिन पूरे वर्ष गतिविधि नहीं होती है। साल में महज एक बार जिलास्तरीय प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। जबकि जरूरत है पूरे साल गतिविधियों की। प्रेक्टिस के साथ अगर हर माह प्रतियोगिता हो तो इससे भी काफी फर्क पड़ेगा और खिलाडिय़ों की प्रतिभा निखरेगी। इसके अलावा जिस तरह से क्रिकेट खेल में आईपीएल सहित अन्य प्रतियोगिता हो रही है। उसी तरह फुटबॉल में भी होना चाहिए। इससे भी खिलाडिय़ों को काफी प्रोत्साहन मिलेगा।
महिला खिलाडिय़ों की संख्या भी कम
जिले में वर्तमान में 12 से अधिक पुरुष फुटबॉल टीम है। हालांकि महिला फुटबॉल टीम की संख्या काफी कम है। इसके पीछे एनआईएस कोच की कमी है। इसके अलावा बेहतर सुविधाएं न मिलना भी बड़ी वजह है। खिलाड़ी जिला मुख्यालय पर फुटबॉल स्टेडियम में सुबह-शाम प्रेक्टिस भी कर रहे हैं।
विकासखंड में भी सुविधाओं की कमी
जानकारों का कहना है कि सरकार ने विकासखंडों में खेल मैदान तो बना दिया है, लेकिन अच्छे कोच की नियुक्ति नहीं की है। जबकि अगर गुरु अच्छा होगा तो खिलाड़ी भी तरासे जाएंगे और वे राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। वर्तमान में खिलाडिय़ों को खुद के खर्च से ही खेल सामान लेना पड़ता है। उनको एक अच्छे खानपान की जरूरत रहती है। कई खिलाड़ी निर्धन तपके से आते हैं। खानपान के अभाव में उन्हें परेशानी होती है। परिवार की तरफ से भी परेशानी होती है। अगर हर विकासखंड में एकेडमी होती और अच्छे खिलाडिय़ों को सरकार प्रोत्साहन राशि देती तो जिले में फुटबॉल की तस्वीर ही कुछ और होती। स्टेडियम कमेटी खिलाडिय़ों से फीस लेकर 12 कर्मचारियों के वेतन सहित ग्राउंड के रखरखाव का काम कर रही है।
मैंने वर्ष 2004 में फुटबॉल खेल में प्रदेश की तरफ से संतोष ट्राफी खेला था। उस समय मेरी उम्र 27 वर्ष थी। लेकिन आगे नहीं खेल सका। पारिवारिक जिम्मेदारी की वजह से खेल को छोडऩा पड़ा। खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन की जरूरत है। कई विभागों में खेल कोटा खत्म हो गया है। आज अच्छे कोच नहीं मिल रहे हैं। खिलाडिय़ों को स्पांसर नहीं मिल पाता। सुविधाएं सीमित हैं। साल में एक ही बार ही फुटबॉल प्रतियोगिता होती है। पूरे साल गतिविधि होनी चाहिए। आईपीएल की तर्ज पर फुटबॉल खेल में भी खिलाडिय़ों के लिए बेहतर विकल्प होना चाहिए।
अब्दुल कलीम खान, पूर्व खिलाड़ी
छोटे से जगह से निकलकर हमलोग देश-विदेश में भी हम बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए हमें स्थानीय स्तर पर जरूरी सरकारी सुविधाओं भी दरकार है। मैं बचपन से फुटबॉल खेल रहा हूं। मैंने वर्ष 2005 में संतोष ट्राफी खेला। मुझे सरकारी स्तर से कोई सुविधा नहीं मिल सकी। यहां और भी कई खेल प्रतिभा मौजूद है। जरूरत है तो बस इसे निखारने की। खिलाडिय़ों की प्रतिभा स्थानीय स्तर तक ही सिमट कर रह जा रही है। सरकार को चाहिए कि वह खिलाडिय़ों को तरासे और उन्हें बेहतर सुविधा मुहैया कराए। खेल ग्राउंड के साथ अच्छे कोच, अच्छी सुविधा और बेहतर प्लेटफॉर्म ही उत्कृष्ट खिलाड़ी दे सकता है।
वैभव मिश्रा, पूर्व खिलाड़ी, फुटबॉल
जिले के कई फुटबॉल खिलाड़ी ओपन में नेशनल खेल चुके हैं। हमारे यहां उच्च स्तरीय फुटबॉल स्टेडियम है। प्रदेश के चुनिंदा जगहों में से एक है। यहां ग्रासी ग्राउंड है। पिछले साल सब जूनियर, जूनियर नेशनल गेम्स का शिविर इसी ग्राउंड पर लगा था। 21 अगस्त से जिलास्तरीय प्रतियोगिता होगी। खिलाडिय़ों के लिए अवसर बहुत है। हां यह बात जरूर है कि अगर सरकार खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करे तो तस्वीर काफी बदल जाएगी। सरकार को इस पर ध्यान देना होगा। फुटबॉल में कई अच्छे खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। बशर्ते उन्हें सुविधाएं मिलें।
मुकेश कुमार नेमा, सचिव, संघ सचिव
Published on:
20 Jun 2026 12:12 pm
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