
दुष्कर्म के दोषी को दस साल की सजा
सिवनी. अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत पीडि़ता कलाबाई को शासन की ओर से उसके नाम से सहायक आयुक्त कार्यालय आदिम जाति कल्याण विभाग सिवनी में उसके नाम से 25000 रुपए की राशि जमा की गई थी। वही राशि को पीडि़ता उक्त कार्यालय में लेने के लिए गई थी तो उसे उस समय यह कहा गया कि वह अपना जाति-प्रमाण पत्र लेकर आए।
कलाबाई ने पुन: 19 जुलाई 2009 को अपना जाति-प्रमाण पत्र लेकर 25000 का चेक लेने के लिए वह पहुंची तो उपरोक्त कार्यालय में उसे बताया गया कि नरेश डेहरिया के साथ एक लड़की आई थी उसने अपना नाम कलाबाई अर्थात पीडि़ता का बता कर फर्जी हस्ताक्षर कर चेक ले गए हैं। इसके बाद कलाबाई ने पता किया तो ग्राम बेलपेट थाना कुरई का नरेश डेहरिया जो कि कोटवार का लड़का था उसके द्वारा किसी अन्य लड़की को उसके स्थान पर कलाबाई बता कर बेईमानी से उसके नाम की जो राशि का चेक प्राप्त कर उक्त राशि को हड़प लेने की गरज से कलाबाई के नाम से चित्ररेखा उर्फ चित्रलेखा का मुख्य डाकघर सिवनी में खाता खुलवाया। जिसे नरेश डेहरिया द्वारा पहचान की गई कि वह कलाबाई ही है।
इस प्रकार पीडि़ता की 25 हजार रुपए की राशि को आरोपी नरेश डेहरिया तथा आरोपिया चित्रलेखा उर्फ चित्रलेखा द्वारा हड़प लिया गया था। जिसकी शिकायत पीडि़ता कलाबाई ने थाने में की थी जिस पर थाना सिवनी के द्वारा शिकायत पत्र की जांच किया गया तो चित्रलेखा और नरेश के द्वारा कलाबाई के नाम पर मुख्य डाक घर सिवनी में खाता खोला गया और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में उक्त राशि 25 हजार रुपए जमा की गई। एक राशि का चेक और अन्य दस्तावेजों को जप्त किया गया। उक्त जब्तशुदा दस्तावेजों को हस्तलेख विशेषज्ञ पुलिस मुख्यालय भोपाल को भेजा गया जिसकी रिपोर्ट आने पर आरोपी नरेश डेहरिया निवासी बेलपेट थाना कुरई तथा आरोपियों चित्रलेखा उर्फ चित्ररेखा पत्नी महेश उम्र 29 वर्ष निवासी सिंगोली अमरवाड़ा छिंदवाड़ा के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता के अधीन प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध की गई और विवेचना पूर्ण होने पर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। जिस पर विचारण न्यायालय अवनींद्र कुमार सिंह अपर सत्र न्यायाधीश सिवनी के सत्र प्रकरण पर आरोपिया चित्रलेखा उर्फ चित्ररेखा पत्नी महेश तथा नरेश पिता साहूलाल डेहरिया को 2 जुलाई को उपरोक्त अपराधों में दोषसिद्धि पाते हुए दोनों आरोपीगणों को धारा 420 के अंतर्गत तीन वर्ष का कठोर कारावास, धारा 467 भारतीय दंड संहिता के अधीन तीन 3-3 वर्ष का कठोर कारावास तथा दोनों आरोपीगणों को धारा 468 के अधीन 3-3 वर्ष का कठोर कारावास और दोनों आरोपीगणों को उपरोक्त तीनों धाराओं में कुल 15000 रुपए अर्थदंड तथा अर्थदंड न चुकाने पर 2-2 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
प्रभारी मीडिया सेल सहायक जिला अभियोजन अधिकारी मनोज सैयाम ने बताया कि इस मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता तरुण विश्वकर्मा के द्वारा पैरवी की गई।
Updated on:
04 Jul 2018 12:18 pm
Published on:
04 Jul 2018 02:00 pm
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