
सिवनी. कथा और कीर्तन से मन का शुद्धिकरण होता है। बड़े भाग्य से मनुष्य का तन मिलता है और बड़े ही सौभाग्य से मनुष्य को कथा सुनने का मौका मिलता है। जैसे गंगाजल पुराना नहीं होता, वैसे ही कथा भी कभी पुरानी नहीं होती है। कथा श्रवण से तीन प्रकार के पापों का निवारण होता है और धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उक्ताशय की बात स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिष्य बनारस से आए हितेन्द्र शास्त्री ने ग्राम पंचायत डोकररांजी (केवलारी) में जारी श्रीमद्देवी भागवत पुराण में श्रद्धालुजनों से कही।
कथा समाप्ति के दिन शास्त्री ने कहा कि कथा पांडाल में बैठना भी एक तपस्या है, क्योंकि यहां बैठने के लिए लोगों को चार घंटे तक सांसारिक जीवन को भूलना पड़ता है। तप से फल की प्राप्ति जरूर होती है। उन्होंने कहा कि भगवती देवी के मंत्र जाप का बड़ा महत्व है। देवी आराधना करना कठोर है, लेकिन सच्चे मन से करने पर बिगड़े काम बन जाते हैं। गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। देवी मंत्र का पाठ करने वाले को कोई तंत्र , मंत्र व विद्या पकड़ नहीं सकती। कलियुग में कथा का आश्रय ही सच्चा सुख प्रदान करता है। कथा श्रवण करने से दु:ख और पाप मिट जाते हैं। सभी प्रकार के सुख एवं शांति की प्राप्ति होती है। श्रीदेवी पुराण कलयुग का अमृत है।
सिद्धांतों के विरुद्ध है एकात्म यात्रा
हितेन्द्र शास्त्री ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित करने और जनजागरण के लिए निकाली जा रही एकात्म यात्रा का शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने विरोध किया है। उनका कहना है यह यात्रा देश, काल एवं सिद्धांतों के बिल्कुल विरुद्ध है।
कथा आयोजक पं. राधेश्याम, मनोरमा, जितेन्द्र रीना, हिमांशी तिवारी, शिवशरन तिवारी, ब्रजमोहन बब्लू डॉली तिवारी ने बताया कि काशी बनारस से आए कथा वाचक हितेन्द्र शास्त्री द्वारा श्रीदेवी पुराण महायज्ञ का श्रवण करने आसपास के गांव समेत अन्य जिले से बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन पहुंचकर धर्मलाभ लिए। गुरुवार को पूर्णाहूति के साथ हवन पूजन एवं भण्डारा प्रसाद वितरण किया गया।
Published on:
12 Jan 2018 12:18 pm
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