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मोरे सजना रे, दारु पीना छोड़ दो…

साहित्यकार, कवि ने सुनाईं अपनी रचना

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Sunil Vandewar

Jul 04, 2016

seoni

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सिवनी.
सहमत साहित्यिक संस्था के तत्वाधान में आयोजित काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि डॉ रामकुमार रामारैया बालाघाट, अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अरविंद मानव, विशिष्ट अतिथि राजेन्द्र शुक्ल, अलका चौधरी की उपस्थिति में स्थानीय दिगंबर जैन धर्मशाला में आयोजित की गई।

इस कार्यक्रम में नरेन्द्र कौशल, छिद्दीलाल श्रीवास, नवीन जैन, अरविंद कर्वे, साहिबलाल दशरिया, जगदीश तपिश, अरविंद मानव, देवानंद विश्वकर्मा की उपस्थिति में रात के दूसरे पहर तक लोगों ने कविता का आनंद लिया।

आयोजन के दौरान स्कूल चलें अभियान, ग्रामोदय भारत, बेटी बचाओ, देश के सिपाही की शहादत, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, नशाखोरी सहित हिन्दी के नवरस पर गीत, गजल, छंद, दोहों के माध्यम से यह कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का संचालन संजय जैन ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में अलका चौधरी अनमोल ने कहा मुझको मेरा हक दे दो मां, कुछ करके दिखलाऊंगी, आने दो इस दुनिया में, मैं अपना फर्ज निभाऊंगी। जगदीश तपिश ने कहा माचिसें क्यों रख रहे हैं आप यूं कपास में, और भी रहते हैं लोग, अपने आस-पास में। अरविंद मानव ने कहा यहां चली-मैं वहां चली, मैं वासन्ती हवा चली, डॉ रामकुमार रामारैया ने कहा या तो आप आइए, या हमें बुलाइए, सन्नाटा चारों ओर है, तो गुनगुनाइए। संजय जैन ने कहा जैसा मौका देखे वैसा, बोले मेरी गजल, जो बातें मैं न बोलूं, बोले मेरी गजल। अरविंद कर्वे ने कहा मेरी जिंदगी में ये कैसी होगी हार, मैंने अपने पान में डाला है चमन बहार। नवीन जैन ने कहा सत्य ही शिव है, शिव ही सुंदर है।

आयोजन के दौरान नरेन्द्र कौशल ने कहा मोरे सजना रे, दारू पीना छोड़ दो। बालाघाट के राजेन्द्र शुक्ल ने कहा डालकर पांव में बेड़ी, मुझे चलने को कहते हैं, काट कर पंख वो मेरे, मुझे उडऩे को कहते हैं। साहिबलाल दशरिया ने कहा जीवन के दिन चार मन, क्यों बीमार पड़ा है, रहना जिनको साथ-साथ है, फिर क्यों यार लड़ा है। छिद्दीलाल श्रीवास ने कहा धूम्रपान और शराब करती है तन को खराब। इस कार्यक्रम के दौरान सिवनी के साहित्यकार रामकुमार चतुर्वेदी की काव्यकृति हिन्दी वर्णमाला एवं भारत के सपूत नामक किताब का विमोचन किया गया।

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