आयोजन के दौरान स्कूल चलें अभियान, ग्रामोदय भारत, बेटी बचाओ, देश के सिपाही की शहादत, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, नशाखोरी सहित हिन्दी के नवरस पर गीत, गजल, छंद, दोहों के माध्यम से यह कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का संचालन संजय जैन ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में अलका चौधरी अनमोल ने कहा मुझको मेरा हक दे दो मां, कुछ करके दिखलाऊंगी, आने दो इस दुनिया में, मैं अपना फर्ज निभाऊंगी। जगदीश तपिश ने कहा माचिसें क्यों रख रहे हैं आप यूं कपास में, और भी रहते हैं लोग, अपने आस-पास में। अरविंद मानव ने कहा यहां चली-मैं वहां चली, मैं वासन्ती हवा चली, डॉ रामकुमार रामारैया ने कहा या तो आप आइए, या हमें बुलाइए, सन्नाटा चारों ओर है, तो गुनगुनाइए। संजय जैन ने कहा जैसा मौका देखे वैसा, बोले मेरी गजल, जो बातें मैं न बोलूं, बोले मेरी गजल। अरविंद कर्वे ने कहा मेरी जिंदगी में ये कैसी होगी हार, मैंने अपने पान में डाला है चमन बहार। नवीन जैन ने कहा सत्य ही शिव है, शिव ही सुंदर है।