हमारी संस्कृति सनातन है। हमारे संस्कार विश्व बंधुत्व की भावना से युक्त हैं। श्रीकृष्ण का जीवन साहस, शौर्य, वीरता, उल्लास एवं प्रेम से भरा है। भगवान श्रीकृष्ण लोकनायक, राष्ट्रनायक, कर्मयोगी एवं गीता के उपदेशक रहे हैं। उन्होनें संस्कृति समाज एवं राष्ट्र के उत्थान हेतु अन्याय और अत्याचार के खिलाफ शंखनाद करके तब तक नहीं रुके जब तक कि असुरी शक्तियों को समूल नष्ट नहीं कर दिया। देश और समाज को आंतकित और भयभीत करने वाले बड़े-बड़े राक्षसों का वध कर धर्म की पुन: संस्थापना करके भारतीय संस्कृति का संरक्षण, संवद्र्धन एवं उत्थान का कार्य किया।