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वैश्विक सर्वे: भारतीय टैक्स सिस्टम पर बढ़ा भरोसा, ईमानदारी में दुनिया को पीछे छोड़ा

वैश्विक सर्वेक्षण 'पब्लिक ट्रस्ट इन टैक्स 2025' के अनुसार, भारत में कर नैतिकता और पारदर्शिता के प्रति अटूट विश्वास देखा गया है। रिपोर्ट बताती है कि 68% भारतीय अवसर मिलने पर भी टैक्स चोरी के खिलाफ हैं, जबकि 80% नागरिक देश के सतत विकास और पर्यावरणीय सुधार के लिए अतिरिक्त कर देने को तैयार हैं। यह सर्वे भारतीयों की उच्च ईमानदारी और कर प्रणाली के प्रति समाज के बढ़ते भरोसे को प्रदर्शित करता है।

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हालिया जारी वैश्विक सर्वेक्षण 'पब्लिक ट्रस्ट इन टैक्स 2025: एशिया एंड बियॉन्ड' ने भारत की कर प्रणाली और नागरिकों के कर व्यवहार को लेकर बेहद उत्साहजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कर अनुपालन और राजकोषीय प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास दुनिया के कई विकसित देशों की तुलना में काफी मजबूत है। यह रिपोर्ट एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड अकाउंटेंट्स, आइएफएसी, और ओईसीडी द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई है, जिसमें 29 देशों के 12,000 से अधिक लोगों की राय ली गई।

सर्वे के सबसे सकारात्मक आंकड़ों में से एक यह है कि 68% भारतीयों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अवसर मिलने पर भी टैक्स चोरी को सही नहीं ठहराएंगे। यह भारतीयों की उच्च 'कर नैतिकता' और ईमानदारी को दर्शाता है। सर्वे के अनुसार, यूरोप और लैटिन अमरीका की तुलना में एशियाई देशों में कर प्रणालियों को अधिक न्यायसंगत और पारदर्शी माना जाता है। भारत इस भरोसे के मामले में एशिया के अग्रणी देशों में शामिल है।

कर प्रणाली को लेकर भारतीयों में सकारात्मक दृष्टिकोण

  • उच्च कर नैतिकता: 68% भारतीयों ने स्पष्ट किया कि अवसर मिलने पर भी वे टैक्स चोरी को कभी सही नहीं ठहराएंगे। यह भारतीयों की ईमानदारी और सिस्टम के प्रति नैतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
  • सामाजिक जिम्मेदारी: 41% नागरिक टैक्स को वित्तीय बोझ के बजाय समाज और समुदाय के प्रति अपने योगदान के रूप में देखते हैं।
  • सार्वजनिक हित: 45% उत्तरदाताओं का मानना है कि सरकार द्वारा एकत्र किए गए टैक्स का उपयोग सार्वजनिक भलाई के कार्यों में सही ढंग से किया जा रहा है।

सस्टेनेबिलिटी और भविष्य की दृष्टि

रिपोर्ट का सबसे उल्लेखनीय आंकड़ा 'सतत विकास' से जुड़ा है। भारत में लगभग 80% लोग सामाजिक और पर्यावरणीय प्रगति के लिए अतिरिक्त टैक्स देने को तैयार हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय नागरिक राजकोषीय नीति को दीर्घकालिक सामाजिक बदलाव के एक प्रभावी उपकरण के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।