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पृथ्वी पर केवल तीन प्रतिशत पानी पीने योग्य

- आईटीआई कॉलेज में जल संसद कार्यक्रम में बोले वक्ता

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जल संसद कार्यक्रम

जल संसद कार्यक्रम

सिवनी. जल संरक्षण और संवर्धन के लिए जल संसद कार्यक्रम का आयोजन आईटीआई कॉलेज छपारा में हुआ। इसका शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि नगर परिषद उपाध्यक्ष छपारा शिवकांत सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पानी को रोकने एवं उसे संरक्षित करने के लिए शासन स्तर से अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।


सभी को अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए जन संरक्षण के कार्य करने की जरूरत है। कुएं तालाब, बावडिय़ां आदि साफ रहें जो प्रकृति ने हमें दिया है उसे बचाना है। हम जल संरक्षण के कार्य नहीं करेंगे तो हमारी भावी पीढ़ी हमें माफ नहीं कर पाएगी। जल संरक्षण के लिए हमें लोगों को जागरूक बनना होगा और वर्षा के जल को तालाब आदि बनाकर संरक्षित करना होगा।


उपयंत्री जल संसाधन विभाग अस्मिता पटेल नें जल संरक्षण के महत्व के बारे में छात्र/छात्राओं को जानकारी दीं। कहा कि जैसे घरों के नलों में टोटी लगाना चाहिए। हैंडपंप के आसपास सफाई रखनी चाहिए। कहा कि तीन प्रतिशत पानी पृथ्वी पर पीने योग्य है और 97 प्रतिशत पीने योग्य नहीं है। उन्होंने घरों में वाटर हारवेस्टिंग करने की सलाह दी।


उपयंत्री जल संसाधन विभाग ओशी कापुस्कर ने कहा कि वर्तमान समय में धरती का गिरता जल स्तर चिंता का विषय है। जल स्तर निरंतर कम हो रहा है। जल संरचनाओं का निर्माण करना नितांत आवश्यक है। जल ही जीवन है लेकिन जल के बिना जीवन संभव नहीं है।


इस अवसर पर प्राचार्य नलिन तिवारी ने कहा कि हमारी संस्कृति ही जल संस्कृति है। जल ही जीवन है, सृष्टि को आगे बढ़ाने के लिए पानी नितांत आवश्यक है। हम अपनी छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर अमृत तुल्य जल का संवर्धन कर सकते हैं। भविष्यवाणी की गई है कि तृतीय विश्व युद्व का कारण पानी ही होगा। कार्यक्रम के समापन पर सतीश सूर्यवंशी, अमित शर्मा, शैलेंद्र ठाकुर, हर्ष सोनी, नीरज उइके, संजय उईके, पुरूषोत्तम नापित, रंजना गुप्ता, प्रतिभा सोनी, शालिनी उईके, मनीषा थापा आदि उपस्थित रहे।