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घोषणा में सिमटकर रह गया वैनगंगा नदी के उद्धार का संकल्प, भूले जनप्रतिनिधि

गुजरते समय के साथ खो रही अस्तित्व, अभियान का भी नहीं दिख रहा असर

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सिवनी. जिले की जीवनदायिनी वैनगंगा नदी गुजरते समय के साथ अस्तित्व खो रही है, इसके संरक्षण के लिए अब तक कोई कार्य आरंभ नहीं हुआ है। सात वर्ष पहले नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा के दौरान घंसौर क्षेत्र पहुंचे तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा के साथ जिले की वैनगंगा नदी के उद्धार की घोषणा की थी। इस घोषणा का पालन अब तक नहीं हुआ है। हालात यह है कि वैनगंगा नदी सकरी होते जा रही है। वैनगंगा नदी समय के साथ अपने अस्तित्व को खो रही है। वेग थम रहा है और हालात ये हैं कि नदी के दोनों ओर बड़े हिस्से में सूखे जैसे हालात नजर आ रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री ने नर्मदा की तरह वैनगंगा नदी के दोनों ओर पौधरोपण कराने की भी घोषणा की थी। इसके अलावा नदी के उद्धार के लिए योजना बनाने को कहा था। वैनगंगा नदी का उद्गम स्थल मुंडारा ही उपेक्षा के कारण बदहाल है। वैनगंगा नदी जिले के चार विकासखंडों के सैकड़ों गांव से होते हुए बालाघाट पहुंचती है। उद्गम स्थल में बनाया गया कुंड भी उपेक्षा व लापरवाही के कारण बदहाल हो गया है। कुंड से निकलने वाली वैनगंगा की धार पतली हो गई है। हालांकि कुछ संगठनों और स्थानीय लोगों ने वैनगंगा के उद्गम स्थल के कुंड व इसके आसपास सफाई कराई है, लेकिन उनके इस प्रयास में शासन के हस्तक्षेप की दरकार है।

जनसहयोग से हो संरक्षण के प्रयास
गर्मी का मौसम आने से पहले ही वैनगंगा नदी का जल स्तर कम होने लगा है। छपारा स्थित वैनगंगा नदी के विभिन्न घाटों से नदी का पानी 25 से 30 फीट दूर चला गया है। छपारा के लोगों ने बताया है कि गर्मी के दिनों में वैनगंगा नदी में पानी की पतली धार ही बचती है। इससे लोगों को पानी की समस्या के साथ किसानों को भी दिक्ककतों का सामना करना पड़ता है। वहीं मवेशियों के लिए भी जलसंकट उत्पन्न होता है। केवलारी क्षेत्र के मां रेवा ग्रामोत्थान समिति के सदस्यों ने कहा कि वैनगंगा के संरक्षण के लिए शासन को नागरिकों के साथ अभियान चलाना चाहिए। तभी इस नदी का अस्तित्व रहेगा।

नदी में मिला रहे गंदगी
वैनगंगा नदी के तट के पास ही देशी शराब दुकान, मटन, मछली मार्केट है। इसकी गंदगी लगातार ही वैनगंगा नदी में समा रही है। जीवनदायिनी वैनगंगा लगातार प्रदूषित होती जा रही है। लोग कचरा और अवशिष्ट पदार्थ तट पर फेंक रहे हैं। मछली, मटन मार्केट और देशी शराब दुकान होने के कारण यहां लोगों का हुजूम लगा रहता है।

संकरी हुई नदी
छपारा समेत वैनगंगा नदी के किनारे बसे गांव के लोगों का कहना है कि वैनगंगा नदी का उद्धार जरूरी हो गया है। इस नदी का पानी एशिया के सबसे बड़े मिट्टी से बने भीमगढ़ बांध में समाता है। इसी से सिवनी सहित कई गांव में पेयजल के अलावा बालाघाट जिले में भी भीमगढ़ का पानी पहुंचता है। इसके उद्धार की योजना न बनने से सिवनी, लखनवाडा, छपारा, पलारी, केवलारी सहित अन्य क्षेत्रों में काफी कम हो गई है। हर वर्ष भू-स्खलन व मिट्टी के कटाव से नदी सकरी हो रही है। समय रहते संरक्षण के प्रयास नहीं हुए तो वैनगंगा का स्वरूप नदी के बजाए छोटे नाले सा रह जाएगा। हजारों किसानों की फसलें सिंचाई के अभाव में बर्बाद हो जाएंगी।

जून माह में चला था अभियान
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल गंगा संवर्धन अभियान 5 से 16 जून तक क्षेत्र के नदी, तालाब, कुओं और बावड़ी सहित सभी जल स्रोतों के जीर्णोद्धार एवं साफ -सफाई स्थानीय प्रशासन व जन भागीदारी से किया हालांकि यह सिर्फ दिखावा ही बनकर रह गया। अभियान को गंभीरता से नहीं लिया गया। जमीन पर कोई सार्थक प्रयास न किया जाकर स्थानीय प्रबंधन ने सिर्फ फोटो खिंचवाकर रस्म अदायगी कर अभियान का काम पूरा किया।

इनका कहना है…
हमलोगों ने काफी प्रयास किया है। मुंडारा में ही बड़े पैमाने पर आमलोगों एवं प्रशासन के सहयोग से मैंने अभियान चलाया था। जिसका बेहतर परिणाम भी रहा। वैनगंगा नदी जीवनदायिनी हैं। सदियों से पूज्य हैं। हम सरकार से मांग करेंगे कि जैसे अन्य नदियों का उद्धार हो रहा है वैसे वैनगंगा नदी का भी हो।
दिनेश राय, विधायक, सिवनी