
तीन पीढिय़ों की दोस्ती को सींच रहा आम का बगीचा
अखिलेश ठाकुर सिवनी. जीवन के आपाधापी के दौड़ में तेजी से बढ़ रहे परिवारिक विघटन। मां-बाप, भाई-बहन, भाई-भाई, पति-पत्नी के संबंधों में आ रहे दरार। जिले में तार-तार हो रहे रिश्तों के बीच बडग़ांवा में कौमी एकता की मिशाल पेश करती एक एक खबर सामने आई है। यहां इब्राहिम और बबलू की दोस्ती तीन पीढिय़ों से चली आ रही है। इसका गवाह उनके आम के बगीचे हैं। उनकी दोस्ती को यह बगीचा 80 सालों से सींच रहा है।
जिला मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर बडग़ांवा निवासी हीरापत राव एवं अब्दुल करीम (दोनों का निधन हो चुका है।) की मुलाकात करीब 80 वर्ष पूर्व आम के धंधे को लेकर हुई। हीरापत का आम का बगीचा था और अब्दुल करीम व्यापारी थे। उनकी मुलाकात दोस्ती में बदल गई। लंबे समय तक दोनों साथ-साथ आम के बगीचे की रखवाली से लेकर व्यापार करते रहे। उनके बाद अब्दुल के पुत्र मो. सफी और हीरापत के पुत्र महादेव की दोस्ती हुई। दोनों की यह दोस्ती पिता की विरासत में मिली (मो. सफी और महादेव का भी निधन हो चुका है।)। दोनों ने आजीवन दोस्ती निभाया। उनके बाद मो. सफी के पुत्र इब्राहिम और महादेव के पुत्र बबलू ने दादा से विरासत में मिली दोस्ती को वर्तमान में कायम रखा है। खास है कि तीन पीढिय़ों से चली आ रही इस दोस्ती में कभी अनबन नहीं हुआ है। दोनों वर्तमान में बगीचे की रखवाली करते हैं और सिवनी सहित आसपास के जिलों में आम बेचते हैं। उनके पास पहले एक बगीचा था अब चार हो चुके हैं।
बबलू व इब्राहिम का परिवार रहता है संयुक्त
बबलू, रविशंकर व शिवदास तीन भाई हैं। इब्राहिम, शमीम, नसीम व नासिर चार भाई हैं। बबलू का संयुक्त परिवार बडग़ांवा में रहता है, जबकि इब्राहिम का संयुक्त परिवार सिवनी में रहता है। दोनों का परिवार एक दूसरे के सुख-दु:ख में दिन-रात खड़ा रहता है। बगीचे से प्रतिवर्ष उनको करीब आठ लाख रुपए की आमदनी होती है। दोनों तीन पीढिय़ों से चले आ रहे फॉर्मूले (सूत्र) पर ही वर्तमान में पैसे का बंटवारा करते हैं। उनके बीच कभी भी हिसाब-किताब को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ है।
ये हैं बगीचे
10 एकड़ - 250 पेड़।
चार एकड़ - 125 पेड़।
चार एकड़ - 60 पेड़।
चार एकड़ - 55 पेड़।
(सभी बगीचे बडग़ांवा में है।)
दोनों परिवार मिलकर मनाते हैं त्योहार
इब्राहिम ने बताया कि तीन पीढिय़ों से चली आ रही हमारी दोस्ती को पूरा परिवार निभाता है। हम लोगों एक दूसरे का त्योहार मिलकर मनाते हैं। होली और ईद का इंतजार हम दोनों के परिवार को रहता हैं। बताया कि बगीचे से प्रतिदिन १५ टन आम निकलते हैं, जिसको थोक रेट पर व्यापारियों को बेचते हैं। वर्तमान में लंगड़ा, बांबे ग्रीन, चौसा, दशहरी आम उनके बगीचे से निकल रहे हैं। आम का थोक मूल्य 20-30 रुपए प्रति किलोग्राम हैं।
कई लोगों ने भड़काया, नहीं कम हुआ भरोसा
बबलू ने बताया कि तीन पीढिय़ों से चली आ रही दोस्ती को तोडऩे के लिए कई लोगों ने प्रयास किए, लेकिन अभी तक हम दोनों का एक दूसरे पर भरोसा कम नहीं हुआ है। बताया कि पूर्व में भोपाल में लगने वाले एग्जीवेशन में हमारे बगीचे के आम जाते थे, जिसका पहला पुरस्कार हमलोगों को मिलता था। उद्यानिक विभाग के अधिकारी पहले बगीचे में आते थे और सुझाव देते थे। खाद्य व दवा भी देते थे, लेकिन अब उनसे कोई सुझाव नहीं मिलता है। वे आते भी नहीं है।
कलक्टर ने अमले के साथ चखा है आम का स्वाद
बडग़ांवा के महादेव के बगीचे का आम महाकौशल में प्रसिद्ध है। कलक्टर प्रवीण सिंह अमले के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान बडग़ांवा पहुंचने पर आम के बगीचे का अवलोकन कर चुके हैं। वे यहां अमले के साथ आम का स्वाद भी चखे हैं।
Published on:
10 Jun 2019 11:50 am
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