
मध्यप्रदेश के इस पंचायत के दो लोगों की दो बार मौत
अखिलेश ठाकुर सिवनी. मृत्य प्रमाण पत्र को यदि मरने का प्रमाण माना जाए तो जिला मुख्यालय से करीब ६० किलोमीटर दूर कुरर्ई तहसील के पीपरवानी ग्राम पंचायत के दो लोग की दो बार मौत हुर्ई है। इसमें मृतक केगू बाई साढ़े १७ एकड़ जमीन की मालकिन है। केगू के दो मृत्यु प्रमाण पत्र सामने आए हैं। इनके अलावा ग्राम पंचायत के गोपीचंद के दो मृत्यु प्रमाण पत्र ग्राम पंचायत से जारी हुए हैं। यह मामला जिला पंचायत सीइओ स्वरोचिष सोमंवशी द्वारा विगत पखवारे उक्त ग्राम पंचायत के सचिव सुरेश को निलंबित किए जाने के बाद सामने आया है।
ग्राम पंचायत सचिव सुरेश ने यह बात स्वीकार किया है कि उसका निलंबन दो मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होने से हुआ है। हालांकि उनका कहना है कि इस मामले में लिपकीय त्रुटी से ऐसा हुआ है। एक मृत्यु प्रमाण पत्र में गोपीचंद पिता टीकाराम का मृत्यु दिनांक ११ दिसम्बर १९८१ दर्र्ज हैं। दूसरे में ११ दिसम्बर १९८८ दर्ज है। दोनों प्रमाण पत्र पंचायत ने जारी किया है। इसके अलावा ग्राम पंचायत से केगू के जारी मृत्यु प्रमाण पत्र में तिथि २२ अप्रैल १९९२ दर्ज है। मधुकर व उनके पक्ष के लोगों का दावा है कि पुलिस की सूचना अनुसार जन्म-मृत्यु पंजीयन एवं संचालक आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय मध्यप्रदेश भोपाल के मुख्य पंजीयक के जारी प्रमाण पत्र में केगू के मृत्यु की तिथि १३ जनवरी १९९३ दर्ज है। केगू के मृत्यु प्रमाण पत्र में कौन सही और गलत है। यह जांच का विषय है। केगू की मौत सड़क हादसे में हुई थी। इस बात को केगू के परिजन मधुकर व उनके विरोधी पक्ष के हुकूमचंद स्वीकार कर रहे हैं। मधुकर व उनके पक्ष के लोगों का आरोप है कि ग्राम के हुकूमचंद व उनके पक्ष के लोगों ने फर्जी वसीयतनामा बनवाने के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करवाया है। उधर हुकूमचंद का कहना है कि उन्होंने केगू की वृद्धावस्था में सेवा की है। उनके पास जो वसीयतनामा है वह सही है।
खास है कि इस मामले में दो से तीन माह के अंतराल में एसडीएम कार्यालय कुरई से दो फैसले हुए हैं। पहला मधुकर के पक्ष में दूसरा हुकूमचंद के पक्ष में हुआ है। इसके पूर्व इस मामले में तहसीलदार ने मधुकर के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद से ही इस मामले को लेकर गांव में दोनों पक्ष एक दूसरे के आमने-सामने हो गए हैं। इसकी शिकायत कमिश्नर, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक आदि के यहां करने की प्रक्रिया चल रही है।
मेरे संज्ञान में लाना चाहिए मामला
इस प्रकरण के बारे में देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। यदि संबंधित को लगता है कि उनके साथ गलत हुआ है तो उनको इस मामले को मेरे संज्ञान में लाना चाहिए। इसमें रिवीजन किया जा सकता है।
- कामेश्वर चौबे, एसडीएम कुरई
Published on:
18 May 2018 04:10 pm
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