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जिले 200 एकड़ क्षेत्र में किसानों ने बोई राजमा फसल, बढ़ रहा रकबा

यह कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसल के रूप में उभर रही है।

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कम लागत में अधिक लाभ देने वाली बन रही फसल


सिवनी. कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत जिले में नवीन फसलों को स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कलेक्टर शीतला पटले के निर्देशानुसार एवं उपसंचालक कृषि के मार्गदर्शन में जिले में राजमा फसल को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि राजमा, दलहन वर्ग की फसल है। यह कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसल के रूप में उभर रही है। अन्य फसलों की तुलना में इसमें कम पानी एवं कम उर्वरक की आवश्यकता होती है। साथ ही यह फसल भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में भी सहायक है, जिससे आगामी फसलों में उर्वरक की आवश्यकता कम हो जाती है। विकासखंड सिवनी के ग्राम खेरी के किसान आदित्य बघेल ने लगभग 18 एकड़ क्षेत्र में राजमा की खेती की है, जिसकी कटाई का कार्य प्रारंभ हो चुका है। जिले में वर्तमान में लगभग 150 से 200 एकड़ क्षेत्र में राजमा फसल का रकबा विस्तार हुआ है, जिससे आने वाले समय में किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। उपसंचालक कृषि सुधीर कुमार धुर्वे एवं आत्मा परियोजना की टीम द्वारा किसानों के खेतों का निरीक्षण कर उन्हें दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। जिले में नवाचार आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसानों की आय में वृद्धि के प्रयास निरंतर जारी हैं।

किसानों को जल संरक्षण तकनीकी की दी जानकारी

सिवनी. उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा विकासखण्ड सिवनी की ग्राम पंचायत हिनोतिया(रन) में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पानी चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरपंच शिव कुमारी सनोडिया उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी संतोष बघेल ने पानी चौपाल के दौरान किसानों को जल संरक्षण की तकनीकों की जानकारी देते हुए पानी के सदुपयोग पर जोर दिया। उन्होंने ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के अंतर्गत ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर एवं पोर्टेबल स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से कम पानी में अधिक उत्पादन लेकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी शीला इनवाती एवं शिल्पा इंदोरकर ने किसानों को अपनी कुल भूमि के कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से में उद्यानिकी फसलें लगाने की सलाह दी गई। साथ ही सिंचाई जल के समुचित उपयोग पर बल देते हुए विभागीय योजनाओं की जानकारी प्रदान की और पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया समझाई। कार्यक्रम में सरपंच ने भी किसानों से जल संरक्षण अपनाने और अधिक से अधिक उद्यानिकी फसलें लगाने का आव्हान किया।