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जब शिवाजी की बहादुरी पर आदिलशाह भी हुए थे नतमस्तक

महाराज की जयंती पर हुआ आयोजन

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seoni

सिवनी. स्वराज एवं मराठा विरासत को भारत के सुदूर अंचल तक स्थापित करने वाले शिवाजी महाराज की जयंती नगर के शैक्षणिक संस्थान के छात्रों की उपस्थिति में समारोह पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर संस्था छात्र-छात्राओं ने शिवाजी के विषय में प्रस्तुति दी। छात्रों ने बताया कि, शिवाजी ने मुगल शासकों और सैनिकों के महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपमान, हिंसा और शोषण का विरोध किया तथा आप पहले ऐसे शासक थे जिन्होनें महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र की रक्षा के लिए नौ सेना बल की अवधारणा पेश की थी तथा तोरण किले पर विजय प्राप्त की।
बताया कि चाकन और कोंडाना किले को आदिलशाही गवर्नर ने शिवाजी को उनकी बहादुरी से नतमस्तक हो सौंप दिया था। इससे मुगल बादशाह औरंगजेब बेहद नाराज हुआ एवं अपने आगरा के दरबार में ससम्मान उपस्थित होने आश्वासन दिया जिस पर अपने पुत्र शम्भाजी एवं 4000 सैनिकों के साथ उपस्थित हुए परन्तु औरंगजेब ने उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया और उन्होने औरंगजेब का विश्वासघाती कहा जिस पर उन्हें और उनके पुत्र को जयपुर भवन में कैद कर लिया गया परन्तु वह फलों की टोकरी में बैठकर निकलकर रायगढ किला पहुंचे एवं मराठा साम्राज्य को व्यवस्थि किया। शिवाजी की पूर्वी सीमा में बागलना, दक्षिण नासिक एवं पूना, पश्चिम में कर्नाटक तक थी तथा उत्तर भारत में औरंगजेब से युद्ध के चलते सीमाऐं बढ़ती घटती रहीं। शिवाजी को दक्षिण से भगाने के लिए औरंगजेब ने अपने सूबेदार को उन पर आक्रमण के लिए भेजा शिवाजी ने उसके पुत्र का वध कर दिया एवं सूबेदार की अंगुलियॉं काट दी। इससे तिलमिलाए औरंगजेब ने सेनापति मिर्जा, राजा जयसिंह के नेतृत्व में एक लाख सैनिकों की फौज भेजी, जिसे मुंह की खानी पड़ी। शक होने पर जयसिंह को जहर देकर औरंगजेब ने मार डाला। 1674 में रायगढ में उनका राज्य अभिषेक हुआ और वह छत्रपति बने, शिवाजी ने सुल्तान आदिल शाह से बीजापुर का दुर्ग प्राप्त किया एवं कोंकण के 9 दुर्गों में भी विजय प्राप्त की।
जयंती कार्यक्रम के अवसर पर डॉ. केके चतुर्वेदी ने शिवाजी की गौरिल्ला युद्ध तकनीकि एवं छोटे-छोटे समुदायों को एकत्र कर छोटे-छोटे किले विजय कर आगे बढऩे एवं बड़े सामाज्य स्थापित करने के बलवती प्रयास की प्रशंसा की।