स्पेशलिस्ट डॉक्टर की कमी, समय पर महिलाओं को आयरन सुक्रोज न मिला, लगातार फॉलोअप न होना सहित देखरेख के अभाव में प्रसूताएं दम तोड़ रही हैं। वहीं सेप्सिस, निमोनिया, जन्मजात विकृति, जन्म के बाद फेफड़ों में पानी पहुंचना और देखभाल के अभाव में नवजातों की मौत का सिलसिला नहीं थम रहा है।