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अस्पताल से जारी होने वाले डिजिटल बर्थ सर्टिफिकेट को नहीं मान रहे आधार सेंटर

क्यूआर कोड नहीं कर रहे स्कैन, अस्पताल व आधार सेंटरों के चक्कर काटने को मजबूर परिजन

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क्यूआर कोड नहीं कर रहे स्कैन, अस्पताल व आधार सेंटरों के चक्कर काटने को मजबूर परिजन
शहडोल. जिले भर मेें इन दिनों नर्सरी से कक्षा 12 वीं तक के छात्रों की अपार आइडी बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही समय-समय पर बच्चों का आधार अपडेशन भी किया जाता है। अपार आइडी में आधार कार्ड होना जरूरी है, जिसमें बच्चों के आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र में जन्म और नाम एक समान होना अनिवार्य है। अभिवावक आधार अपडेटशन कराने के लिए परेशान हैं, कारण यह है कि अस्पताल से जारी जन्म प्रमाण पत्र को आधार सेंटर नहीं मान रहे हैं और तरह-तरह के बहाने बताकर भटकाया जा रहा है। जिला चिकित्सालय से जारी जन्म प्रमाण पत्र में क्यूआर कोड को स्कैन करने पर संबंधित जानकारी मिल जाती है, इसके बाद भी आधार केन्द्र के कर्मचारी इसे नहीं मान रहे हैं। जानकारी के अभाव में अभिभावक परेशान हो रहे हैं। जिला अस्पताल के प्राप्त जानकारी के अनुसार हर रोज 10 से 12 लोग जन्म प्रमाण पत्र की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।
ई-मेल में भेजे जा रहे हैं प्रमाण पत्र
जिला चिकित्सालय ने जानकारी में बताया कि अब नए व पुराने सभी जन्म प्रमाण पत्र डिजिटल बनाए जा रहे हैं। इसके लिए अभिभावक आवेदन करते समय अपना ई-मेल आइडी भी दे रहे हैं। दूर दराज से बार-बार आने की समस्या से बचने के लिए प्रमाण पत्र बनने के बाद मेल आइडी में भेज दिया जाता है, जो प्रिंट आउट लेकर आधार सेंटर जा रहे हैं लेकिन आधार सेंटर नहीं मान रहे हैं।
तरह-तरह के बहाने बनाते हैं कर्मचारी
अधिकांश आधार सेेंटरों में जिला चिकित्सालय से जारी डिजिटल प्रमाण पत्र को नहीं माना जा रहा है। प्रमाण पत्र में सील एवं हस्ताक्षर, कलर प्रमाण पत्र, रजिस्टे्रशन नंबर का बहाना बताकर वापस कर दिया जाता है। जबकि डिजिटल प्रमाण पत्र में क्यूआर कोड बना होता है, जिसे स्कैन करने पर बच्चे से सबंधित सभी जानकारी देख सकते हैं। इसके साथ ही रजिस्ट्रेशन नंबर भी अंकित रहता है। भीड़ व दबाव से बचने के लिए आधार सेंटर संचालक बिना सर्च किए लोगों को वापस कर देते हैं। यह सिलसिला बीते करीब 15 दिनों से जारी है।
केस-1
बुढ़ार निवासी मो. शहजाद ने बताया कि बेटा मो. हस्सान का डिजिटल प्रमाण पत्र बन गया है, आधार अपडेट कराने गया तो डिजिटल प्रमाण पत्र में सील लगाने व रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं होना बताया गया, जबकि क्यूआर कोड स्कैन कर नहीं देखा गया। कई बार बुढ़ार से शहडोल की दौड़ लगा चुके हैं।
केस-2
वार्ड 15 निवासी साजिद अंसारी का कहना है कि बेटी हबीब परवीन का जन्म 15 जनवरी 2015 को हुआ है, अस्पताल से डिजिटिल प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है, लेकिन आधार केन्द्र उसे नहीं मान रहा है। कई बार अस्पताल व आधार केन्द्र का चक्कर काट चुका हूं। आधार अपडेट नहीं हो पा रहा है।
केस-3
राकेश कुमार नापित कहना है कि बेटे का जन्म 2007 में हुआ, 5 दिसबर को डिजिटल प्रमाण पत्र बन गया, लेकिन आधार सेंटर का कहना है कि इसमें ओरिजनल सील व हस्ताक्षर नहीं है, वहीं अस्पताल का कहना है कि डिजिटल प्रमाण पत्र में सब कुछ है, अधिक जानकारी के लिए क्यूआर कोड स्कैन कर देख सकते हैं।