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आजादी का अमृत महोत्सव : टंट्या भील, झलकारी बाई के बलिदानों का किया स्मरण

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान कार्यक्रम आयोजित

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आजादी का अमृत महोत्सव : टंट्या भील, झलकारी बाई के बलिदानों का किया स्मरण

आजादी का अमृत महोत्सव : टंट्या भील, झलकारी बाई के बलिदानों का किया स्मरण

शहडोल. पंडित एस. एन. शुक्ल विश्वविद्यालय में आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश कुमार तिवारी के द्वारा की गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. करुणेश झा के द्वारा संबोधित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. बिनय कुमार सिंह कुलसचिव तथा आयोजन समिति की वरिष्ठ सदस्य प्रो. आरती झा की विशिष्ट उपस्थिति रही। स्वतंत्रता आन्दोलन विन्ध्य क्षेत्र के योगदान पर बोलते हुए डॉ. संजली गुप्ता ने टंट्या भील, झलकारी बाई के बलिदानों का स्मरण कराया। राजनीति विज्ञान विभाग के एम.ए. चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र दीपक तिवारी ने महात्मा गांधी के जीवन मूल्यों को युवाओं की प्रेरणा बताते हुए राष्ट्रीय अस्मिता को अक्षुण्य रखने आह्वान किया। मुख्य वक्ता प्रो. करुणेश झा ने क्षेत्रीय नेतृत्व, पं. शम्भूनाथ शुक्ल, छोटेलाल पटेल, सरस्वती पटेल, डॉ. रणमत सिंह, कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह के साथ अनेकों सेनानियों और नायकों की भूमिका से अवगत कराया। कुलसचिव प्रो. बिनय कुमार सिंह ने इस सम्पूर्ण अभियान के संदर्भ में विश्वविद्यालय की ओर से स्वतंत्रता संग्राम के स्थानीय नायकों और अज्ञात बलिदानियों पर एक संग्रह प्रकाशित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। कुलपति प्रो. मुकेश कुमार तिवारी ने इतिहास लेखन में राष्ट्रीय आन्दोलन के इतिहास की विसंगतियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए स्वतंत्रता संग्राम की लम्बी परम्परा का उल्लेख किया तथा विश्वविद्यालय की ओर से आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी में प्रकाशन के लिए समिति को प्रेरित किया। डॉ. गीता सराफ ने मध्यप्रदेश के विजयराघवगढ़ से स्वतंत्रता सेनानी सूरज सिंह के योगदान से अवगत कराया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. गीता सराफ ने किया। कार्यक्रम में आयोजन समिति की संचालक डॉ. चेतना सिंह, प्रो. नीलमणि दुबे, प्रो. सुनीता बाथरे, डॉ. मनीषा तिवारी व सभी अतिथि व्याख्याताओं की उपस्थिति में स्वतंत्रता के योद्धाओं को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया गया।