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इस घर में परिवार के साथ रहती हैं मधुमक्खियां : 18 साल में किसी को नहीं काटा, बनी कोतुहल का विषय

सत्यभान पटेल के घर कई सालों से मधुमक्खियों का डेरा हैं। ये इलाके में कौतूहल का विषय भी है। परिवार समेत इलाके के लोग इसे मेन फ्रेंडली मधुमक्खियां कहते हैं।

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इस घर में परिवार के साथ रहती हैं मधुमक्खियां : 18 साल में किसी को नहीं काटा, बनी कोतुहल का विषय

आपने अकसर मधुमक्खी के हमले की घटनाएं देखी और सुनी होंगी। कई बार बिना किसी गलती लोग मधुमक्खी के हमले का शिकार हो जाते हैं। यानी मधुमक्खी की सक्रीयता वाले क्षेत्र में पहुंच पाना भी आमतौर पर लोगों के लिए संभव नहीं है, क्योंकि वो हमला कर देती हैं। लेकिन, अगर हम आपसे कहें कि, एक परिवार ऐसा भी हैं, जो पिछले करीब दो दशकों से मधुमक्खियों के साथ एक ही घर में रह रहा है तो शायद आपको मजाक लगे। लेकिन यकीन मानिये, ये बात सौ फीसदी सच है। हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में रहने वाले एक परिवार की, जो बीते 18 सालों से मधुमक्खियों के साथ एक ही छत के नीचे बिना संकोच रह रहा है।

जिले के अंतर्गत आने वाले सोहागपुर जनपद के ग्राम पंचायत खन्नाथ में रहने वाले सत्यभान पटेल के घर कई सालों से मधुमक्खियों का डेरा हैं। ये इलाके में कौतूहल का विषय भी है। परिवार के लोगों का कहना है कि, छत्ते पर बैठी लाखों मधुमक्खियां शुरु से ही मेन फ्रेंडली रही हैं, ऐसे में घर के किसी सदस्य ने भी उन्हें कभी यहां से हटाने के बारे में नहीं सोचा। खास बात ये है कि, घर के किसी भी सदस्य को तो छोड़िये यहां आने वाले किसी मेहमान को भी इन मक्खियों ने नहीं काटा। कई बार किसी गमी, शादी या अन्य आयोजनों के मौके पर घर में मेहमानों का हुजूम होता है, तब भी ये मधुमक्खियां किसी को नुकसान नहीं पहुंचातीं। यही नहीं, घर की पहली मंजिल पर रहने वाली इन मधुमक्खियों को देखने दूर-दूर से लोग भी अकसर आते रहते हैं।

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हम मधुमक्खियों को बच्चों की तरह पालते हैं

घर की महिला मुखिया सदस्य ललकी पटेल का कहना है कि, करीब 2 दशक पहले मधुमक्खियों ने एक छोटा सा छत्ता यहां बनाया था। देखते ही देखते वो विशालकाय होता गया। एक के बाद दूसरा, दूसरे के बाद तीसरा ऐसे करके लगभग आधा दर्जन छत्ते हमारे घर में बन गए हैं। अब हम इन्हें अपने बच्चों की तरह पालते हैं। हमारे कारण उन्हें कोई तकलीफ न हो, इसका पूरा ध्यान भी हमारा परिवार रखता है।


बस थोड़ी सावधानी बरतना पड़ती है

परिवार के एक और सदस्य सत्यभान पटेल का कहना है कि, मधुमक्खी खुद से कभी किसी को नहीं डंक मारतीं। बस हम खुद थोड़ी सावधानी बरतते हैं। घर में जब कोई ऐसा अवसर आता है, जब यहां ज्यादा भीड़ होती है, तब भी ये हमलावर नहीं होती। घर की छत में हम सभी कार्य करते हैं। हमें कभी कोई परेशानी नहीं होती। घर के छोटे बच्चे हों या बुजुर्ग इन मधुमक्खियों ने अपने से कभी किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।


मधुमक्खियों से जुड़ी आस्था

इलाके में रहने वाले आशीष पटेल का के अनुसार, सत्यभान पटेल के घर में सकुशल रह रही इन मधुमक्खियों को देखने दूर-दूर से लोग उनके घर आते हैं। हम लोगों के बीच मान्यता है कि मधुमक्खी को भ्रामरी के नाम से भी जानी जाती हैं। पौराणिक काल में भ्रामरी माता ने जनकल्याण के लिए एक दैत्य का संहार भी किया था। इसमें कई चमत्कारी गुण होते हैं। इसका वास करना बहुत शुभ माना जाता है। इसकी मौजूदगी से घर में खुशहाली, बरकत तो आती है ही, गरीबी भी दूर होती है।


अनुकूल वातावरण में रहना पसंद करती हैं मधुमक्खियां- अक्सपर्ट

इस संबंध में पर्यवारण विद रिटायर्ड प्रोफेसर और डॉक्टर विनय सिंह का कहना है कि, मधुमक्खियां अनुकूल वातावरण में ही रहना पसंद करती हैं। जहां उन्हें किसी प्रकार की असुविधा और खतरा न हो, सिर्फ ऐसे स्थान पर ही वो अपना छत्ता बनाती हैं। साथ ही, वो ऐसे स्थान का चयन भी करती हैं, जिसके आसपास फूल-पौधे भी हों। खन्नाथ एक कृषि प्रधान गांव हैं। ऐसे में यहां फूलों की खेती भी आम है। यही कारण है कि, ये मधुमक्खियां इस स्थान पर रह रही हैं। हालांकि, इनसे बचकर रहना ही समझदारी है। क्योंकि, एक छोटी सी गलती किसी के लिए भी बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है।