
but now it will play football in Barcelona
शारीरिक कमजोरी को जज्बे से हराया, संघर्ष की सीढिय़ां चढ़ पाई सफलता
शहडोल- जज्बे के आगे हर कमजोरी हार मान जाती है। बाधाएं चाहे शारीरिक हों अथवा सांसारिक जिसने ठान लिया उसने कर दिखाया। कुछ ऐसी कहानी है डिंडोरी जिले के रहने वाले तोशीब अहमद खान की। कमजोरियों को संघर्ष की भट्ठी में पिघलाकर सफलता की नई परिभाषा समाज के सामने पेश की। 10 महीने की अवस्था में ही पोलियो ने पैर छीन लिया, लेकिन वो फुटबॉलर और क्रिकेटर दोनों हैं।
डिंडोरी जिले के शाहपुरा निवासी तोशीब अहमद खान १० महीने की अवस्था में ही पोलियो का शिकार हो गए। दायां पैर पोलियोग्रस्त हो गया। पोलियो ने पैर तो छीन लिया लेकिन तोशीब का जज्बा बरकरार रहा। उसी का नतीजा है कि वह आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल खेलने जा रहा है। तोशीब क्रिकेटर भी गजब का है। 23 वर्षीय तोशीब ने अपनी दिव्यांगता को कभी भी कमजोरी नहीं बनने दिया। अपने मन में कभी भी ये बात नहीं आने दी की मैं दिव्यांग हूं और आज उसी का नतीजा है की इतनी कम उम्र में खेल की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना रहा हूं। तोशीब अहमद खान मल्टीस्कि ल खिलाड़ी हैं। फुटबॉल में बेस्ट गोलकीपर हैं।
अगले साल तोशीब इंडियन दिव्यांग टीम के साथ स्पेन जाने वाले हैं। जहां बार्सिलोना में 7 से 18 अगस्त के बीच सीपीआईएसआरए वल्र्ड गेम्स होने हैं। जिसमें तोशीब भी बतौर गोलकीपर अपनी टीम इंडिया से खेलेंगे। तोशीब अहदम खान का सेलेक्शन सिटी सेवन साइट ए नेशनल चैंपियनशिप के दौरान गोवा में हुआ। स्पेन जाने से पहले तोशीब राजस्थान में टूर्नामेंट के लिए लगने वाले कैंप में हिस्सा लेंगे। इस
मुकाम को पाने के लिए तोशीब ने काफी बड़ा और कड़ा संघर्ष किया है। कई कठिनाइयों को पार करने के बाद इस सफलता की सीढ़ी को पाया है। तोशीब फुटबॉल ही नहीं बल्कि इसके साथ ही क्रिकेट के भी अच्छे खिलाड़ी हैं। तोशीब अहमद खान को तराशने में कई लोगों का हाथ रहा।
Published on:
11 Dec 2017 05:41 pm
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