
शहडोल। जिला मुख्यालय की सीमा में स्थित टांकी नदी के किनारे चार वर्ष में समाजसेवी संस्था ने पूरा जंगल तैयार किया। तितलियाें की घटती प्रजाति को देखते हुए इस जंगल में फॉरेस्ट प्रोटेक्टर ग्रुप ने प्राकृतिक तौर पर ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जो तितलियाें के लिए आवश्यक है। फॉरेस्ट प्रोटेक्टर ग्रुप की इस पहल के सार्थक परिणाम सामने आए और यहां 70 से अधिक प्रकार की प्रजातियाें की तितलियाें ने अपना रहवास बना लिया। इनके साथ बड़ी तादाद में पक्षियाें व खरगोश ने भी यहां अपना ठिकाना बना लिया है। लगभग 250 से अधिक पौधों के इस जंगल को अब सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए साफ करने की तैयारी बनाई जा रही है। जिसे लेकर प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण के लिए तैयार किए गए इस जंगल को बचाने के लिए सामाजिक संस्था सद्गुरु मिशन ने मिला प्रशासन से गुहार लगाई है।
उन्होने मांग की है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ ही विलुप्त हो रही तितलियाें की प्रजाति के लिए भी यह स्थान अति आवश्यक है। इसे देखते हुए इसे संरक्षित किया जाए।
टांकी नदी के किनारे चार वर्ष पहले सतगुरु मिशन संस्था ने फेंसिंग कराकर 250 पौधे लगाए थे। जिन्हे चार वर्ष तक पोषित किया। अब वहां पूरा जंगल तैयार हो गया है। जहां तितलियाें के साथ ही पक्षियाें, खरगोश व लोमड़ियाें का रहवान बन गया है। दु:खुद पहलू यह है कि सीवर लाइन ट्रीटमेंट प्लांट के लिए प्रकृति संरक्षण के लिए तैयार किए गए इस जंगल को साफ करने की तैयारी की जा रही है। जिसे लेकर संस्था ने आपत्ति दर्ज कराते हुए जिला प्रशासन से जंगल को बचाने की मांग की है।
लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और फारेस्ट प्रोटेक्टर ग्रुप के सदस्याें का कहना है कि वह 1 साल से तितलियों का सर्वे कर रहे थे। इस दौरान टांकी नदी के किनारे तैयार किए गए जंगल में कई प्रकार की प्रजातियाें की तितलियां देखने मिली। कई प्रकार की प्रजाति की तितलियाें को देखकर यहां के इकोसिस्टम की जानकारी जुटाने के साथ ही इसे और बेहतर करने के साथ ही तितलियाें के संरक्षण की दिशा में प्रयास प्रारंभ किया है। इसके लिए लोगाें को भी जागरुक करने की आवश्यकता है। इसके लिए वह समय-समय पर अलग-अलग कार्यशाला व अन्य गतिविधियाें के माध्यम से तितलियाें के संरक्षण को लेकर लोगाें को प्रेरित करने का प्रयास करते हैं। तितलियों के बारे में बच्चों को युवाओं को यहां लाकर बता रहे हैं।
तितलियों के अनुकूल है जिले की जलवायु
फॉरेस्ट प्रोटेक्टर ग्रुप के सदस्यों का कहना है कि इस जगह पर हमने जिन तितलियों की पहचान की है। उनमें 70 से ज्यादा प्रकार की प्रजातियां है। इनकी प्रजातियाें की संख्या 100 के पार होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। तितलियों का इकोसिस्टम में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। बहुत सारी प्रजातियों के लिए के लिए पॉलिनेशन का काम तितलियां करती हैं, एक स्वस्थ और संतुलित इकोसिस्टम के लिए तितलियों का होना आवश्यक है। तितलियां अनेक जीवों का भोजन बनती है। तितलियों को नमी वाली जगह, धूप और छाया वाली जगह पसंद होती है। उनके पोषण के लिए वो दलदली क्षेत्रों में नमी वाले जगहों पर मिलता हैं। जिसके अनुसार शहडोल का वातावरण व यहां के जंगल पूरी तरह से अनुकूल है।
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Updated on:
31 Jan 2023 06:55 pm
Published on:
31 Jan 2023 06:54 pm
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