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हेरफेर करने टुकड़ों में की खरीदी, भर्ती में भी गड़बड़ी, बिना प्रशासक अनुमोदन की नियुक्तियां

नगरपालिका धनपुरी में भी सामने आई गड़बड़ी, प्रशासन के जांच प्रतिवेदन में सामने आया कारनामा
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शहडोल

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Amaresh Singh

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Updated: 3 Jul 2021, 1:41 PM IST

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45 लाख रुपए का फर्जी आहरण करने वाले 5 पंचायत सचिव निलंबित, एक पर FIR

शहडोल. खरीदी और वित्तीय अनियमितताओं में सुर्खियों में रहने वाले नगरपालिका धनपुरी में एक बार फिर गड़बडिय़ां उजागर हुई हैं। नगरपालिका परिषद धनपुरी में अनियमितता को लेकर प्रशासक ने 18 जून को जांच करते हुए प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजा है। जांच के दौरान कई वित्तीय अनियमितता भी सामने आई है। 20 हजार से 1 लाख रुपए तक की खरीदी में अ नियमितता की जांच में सामने आया कि कार्यालय संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास शहडोल के पत्र में लेख है कि राशि एक लाख से कम लागत की राशि की सामग्री तीन कोटेशन के माध्यम से एक माह में अधिकतम दो बार क्रय की जा सकती है लेकिन स्वीकृतकर्ता अधिकारी बाजार दर एवं गुणवत्ता से संतुष्ट रहना चाहिए। बैंक धनपुरी धनपुरी के अवलोकन से स्पष्ट है कि मार्च 2021 में 20 हजार से 1 लाख तक 53 बार ट्रांजेक्शन किया गया है। माह अप्रैल 2021 में 44 बार ट्रांजेक्शन किया गया है। माह मई में 45 बार ट्रांजेक्शन किया गया है। खरीदारी के अवलोकन से स्पष्ट है कि एक लाख से ज्यादा की खरीदारी को एक लाख से कम टुकड़ों में तोड़कर खरीदा गया है जो कि मध्यप्रदेश विनिदिष्ट भ्रष्ट आचरण निवारण अधिनियम के तहत दण्डनीय अपराध एवं मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 के तहत वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। खरीद भुगतान से संबंधित कोई जानकारी या अनुमोदन प्रशासक से नहीं लिया गया है। जिससे स्पष्ट तौर पर मध्यप्रदेश क्रय नियमों का उल्लंघन किया गया है।

दैनिक मस्टर पर रखे कर्मचारी, नहीं कराया अनुमोदन
दैनिक मस्टर पर 37 लागों को एक मार्च 2021 से एक मई 2021 के बीच में रखा गया है। जिनको रखने के लिए प्रशासक से किसी प्रकार का अनुमोदन नहीं लिया गया है। अत: इस प्रकार जरूरत से ज्यादा दैनिक वेतन भोगियों को रखकर शासन की राशि का दुरूपयोग किया जा रहा है। औसतन प्रत्येक दैनिक वेतन भोगी को 7 हजार प्रत्येक महीन दिया गया एवं उनको किस कार्य के लिए रखा गया कहीं उल्लेख नहीं है। जांच रिपोर्ट में कहा है कि परिषद का प्रस्ताव रजिस्टर के अवलोकन से साफ है कि प्रशासन से कोई प्रस्ताव अनुमोदन नहीं कराया गया है। 2 लाख 59000 का भुगतान गैर शासकीय प्रक्रिया के तहत कई महीनों से किया जा रहा है। जो कि शासकीय राशि का दुरूपयोग है।

कब कहां काम कराया जानकारी ही नहीं
इस दौरान मस्टर रोल के जांच में यह पाया गया कि किसी भी मजदूरों के दस्तखत नहीं लिए जाते हैं। एवं मजदूरों को कहां, कब किस काम पर रखा जाता है कोई जानकारी नहीं है।

सत्यापन में गायब मिले कम्रचारी, फर्जी मस्टर रोल की आशंका
प्रशासन ने कहा है कि 17 जून को मेरे द्वारा नगरपालिका धनपुरी में कार्यालयीन समय में मस्टर रोल में अंकित दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को उपस्थित रहने के लिए लेख किया जाकर मस्टर रोल के दैनिक भोगी कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन किया गया जिसमें कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। इससे इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि फर्जी मस्टर में लोग रखे गए हैं। नगरपालिका परिषद् धनपुरी में मस्टर रोल पर रखे जाने का कर्मचारियों की प्रशासक से अनुमोदन नहीं लिया गया है। मनमानी तौर पर भर्ती की गई है। जिससे स्थानीय लोगोंं में नाराजगी है। आए दिन शिकायत करते रहते हैं।


हाई मास्ट में भी घोटाला, आइएएस की दबा दी रिपोर्ट
पूर्व में धनपुरी नगरपालिका हाई मास्ट लाइट को भी लेकर सुर्खियों में रही है। यहां भी खरीदी में गड़बड़ी सामने आई थी। एसडीएम आइएएस लोकेश जागीड़ की रिपोर्ट में साफ दोषी बताया गया था लेकिन राजनीतिक रसूख के चलते न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही तबादला किया गया। बाद में सीएमओ को यथावत कर दिया गया है। कार्यालय के पत्र क्रमांक शिकायत 2018/342 6 अप्रैल 2018 द्वारा धनपुरी नगरपालिका सीमएओ द्वारा हाई मास्ट लाईट एलईडी सिस्टम की शिकायतों में भ्रष्टाचार की शिकायत भेजी गई थी। जिस पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामले की शिकायत लगातार पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष हंसराज तनवर और भाजपा मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र श्रीवास्तव द्वारा भी की गई है।