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क्लाइबिंग बॉल पर मधुमक्खियों का कब्जा, छह माह से अभ्यास बंद

क्रीड़ा परिसर प्रबंधन ने वन विभाग को किया पत्राचार, विभाग ने नहीं ली सुध छात्रावास में रह रहे छात्रों को भी खतरा, प्रभावित हो रही खेल गतिविधियां

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शहडोल. जिला मुख्यालय से लगे विचारपुर स्थित क्रीड़ा परिसर में लाखों रुपए खर्च कर बनाई गई क्लाइबिंग बॉल पिछले छाह माह से अनुपयोगी साबित हो रही है। यहां खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह मधुमक्खियों को बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार मधुमक्खियों ने क्लाइबिंग बॉल सहित आस-पास छत्ते बनाकर डेरा डाले हुए हैं। ऐसे में खिलाडिय़ों को मधुमक्खियों के काटने का भय बना रहता है, और वह अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं। इसे लेकर क्रीड़ा परिसर प्रबंधन ने वन विभाग को पत्राचार भी किया था, लेकिन वन विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। प्रबंधन ने अपने मद से कुछ छत्ते हटवाए भी लेकिन मधुमक्खियों ने फिर से कब्जा जमा लिया है। ऐसे में प्रबंधन के साथ ही यहां अभ्यास करने वाले खिलाड़ी भी डरे हुए हैं।
50 से अधिक खिलाड़ी करते हैं अभ्यास
खिलाडिय़ों की प्रतिभा को निखारने के लिए व अन्य प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से क्लाइबिंग बॉल का निर्माण कराया गया था। यहां हर दिन 50 से अधिक खिलाड़ी अभ्यास करते थे। पिछले छह माह से मधु मक्खियों की वजह से इनका अभ्यास थम गया है। खिलाड़ी यहां आते भी हैं तो क्लाइबिंग बॉल में ही कई जगह मधु मक्खियों का छत्ता होने की वजह से वह उसमें चढऩे से डरते हैं। बताया जा रहा है कि मधुमक्खियों ने 10-12 छत्ते क्लाइबिंग बॉल व इसके आस-पास बना रखे हैं।
वन विभाग को भी किया था पत्राचार
मधुमक्खियों के छत्तों को हटाने के लिए क्रीड़ा परिसर प्रबंधन ने वन विभाग को पत्राचार किया था। वन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। विभाग का कहना था कि इसके लिए उनके पास न तो बजट हैं और न ही छत्ता हटाने के लिए समुचित संसाधन। वन विभाग द्वारा कोई पहल न करने पर प्रबंधन ने अपने मद से कुछ छत्तों को हटवाया था, लेकिन फिर से मधमुक्खियों ने कब्जा जमा लिया है।
छात्रावासी छात्रों को भी खतरा
जानकारी के अनुसार क्रीड़ा परिसर स्थित छात्रावास में रह रहे छात्रों को भी मधुमक्खियों से खतरा बना हुआ है। किसी कारण से मधु मक्खियों के हमले से छात्रावास में रह रहे छात्र गंभीर रूप से जख्मी हो सकते हैं।

हमार पास मधुमक्खियों को हटाने व शहद निकालने वाले कोई विशेषज्ञ नहीं है। इस वजह से छत्ते हटाने में समस्या हो रही है।
बादशाह रावत, एसडीओ सोहागपुर दक्षिण वनमंडल