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राजा विराट की नगरी की राह भूल गए मेघ , किसानों के चेहरे में बढ़ी चिंता की लकीरे

खेत में सूख रही धान, नहीं हो पा रही रबी सीजन की बोयनी
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शहडोल

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raghuvansh prasad mishra

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Updated: 8 Oct 2018, 8:52 PM IST

 Clouds forgot the way of Raja Virat's city: Risks of increased concern in the face of farmers

राजा विराट की नगरी की राह भूल गए मेघ , किसानों के चेहरे में बढ़ी चिंता की लकीरे

राजा विराट की नगरी की राह भूल गए मेघ , किसानों के चेहरे में बढ़ी चिंता की लकीरे

शहडोल. कम वर्षा और वो भी समय के पहले बंद हो जाने से किसानों के खेत में खड़ी धान की फसल सूखने की कगार पर है। खेत सूख जाने से जोताई न हो पाने के कारण रबी फसल की अब तक बोनी भी शुरू नहीं हो सकी है। बारिश न होने से निराश किसान सोसायटी से खाद बीज का उठाव भी नही कर रहे है। जिसकी चिंता आक्टूबर माह के शुरुआत में किसानों के चेहरे में स्पष्ट झलकने लगी है।
इस साल कम वर्षा के कारण खेत में धान का रोपा बिलम्ब से लगा था। अधिकांश किसानों के खेत में नागपंचमी के बाद रोपा लगाया जा सका था। जिसमे धान में अब बाल निकल रही है। लेकिन खेत में पानी नहीं है। जिसके कारण बाल में निकल रहे रेड़ा सूख रहे है। जिससे 50 फीसदी से अधिक धान की उपज मारे जाने की संभावना बलबती होती जा रही है। जिसका खामियाजा किसानों को झेलना पड़ेगा। ऐसी हालातों में जिनके पास बोर का साधन है वे कुछ धान के खेतो को पानी दे रहे है। लेकिन धान की फसल बारिश के पानी पर ही निर्भर है। कृत्रिम ढंग से धान की फसल की सिंचाई भले कर दी जाए। उसकी पूरी उपज किसानों को नहीं मिल पाती।
अवर्षा के चलते किसान पिछले दो वर्षो से खेती किसानी की उपज से बंचित है। सोसायटी से कर्ज लेकर खाद बीज खरीद रहे है। लेकिन अन्न का एक दाना भी घर नहीं पहुंच रहा है। लेकिन वर्षा से उपजे किसानों के जख्म में सरकार भी कोई मलहम नहीं लगा रही है।

एक सप्तांह बारिश नहीं हुई तो रबी की फसल भी मारी जाएंगी
अगर एक सप्तांह तक पानी और नहीं गिरा तो किसानों की धान की फसल आधे से अधिक सूख जाएंगी। खेत सूख जाएंगे तो रबी के फसल की बोनी तो दूर रही खेत की जोताई नहीं हो सकेगी। जिससे किसानों पर दोहरी मार की संभावना निर्मित होती जा रही है। अवर्षा के चलते किसान की खरीफ फसल सूख रही है। रबी की बोनी के लिए किसान खेत की जुताई ही नही कर पा रहे है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है वे अभी धान की सिचाई्र कर रहे है। रबी फसल के बोनी का भी समय आ गया है। जिसके लिए किसानो की आसमान की ओर टकटकी लगी हुई है। लेकिन किसानों के अरमानों में इंद्रदेव मेहरवान नहीं हो रहे है।