
Crime Against Women in MP: महिलाओं को खिलाफ बढ़ते अपराध और हिंसा को लेकर पत्रिका रक्षा कवच अभियान में पढ़ें न्याय प्रक्रिया कितनी दर्दनाक.
Crime Against Women in MP: आधी आबादी को खुले आसमान में उड़ान भरने की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन समाज कंटक आड़े आ जाते हैं। ऐसे ही दरिंदों ने एक लड़की के अरमानों को, सपनों को तार-तार कर दिया। बात न्याय पाने के लिए लड़ाई की आई तो व्यवस्था ही इतनी सुस्त है कि मानसिक दर्द बढ़ता जा रहा है।
कोचिंग से लौटते समय एक लड़की सड़क किनारे अपने दोस्त के साथ फोटो खिंचवा रही थी, तभी पांच बदमाश उन्हें जंगल की ओर घसीट ले गए। आरोपियों ने लड़की से बारी-बारी से बलात्कार किया। विरोध पर उसे और दोस्त को तब तक मारा जब तक दोनों बेसुध नहीं हो गए। चार आरोपियों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड था। ऐश्वर्य निधि गुप्ता पर 12 व मन्नू पनिका पर 14 मामले दर्ज थे। ये नशे के कारोबार से जुड़े हैं। इलाके में दूसरे अपराधों के लिए रैकी भी करते थे। घटना के बाद पीडि़ता के शरीर पर चोट के गहरे निशान व रीढ़ की हड्डी में चोट बर्बरता का दर्द बयां करती है।
सहमी पीड़िता कहती है कि न्याय की दहलीज पर दर्द और बढ़ता है। एक वकील ने ऐसा सवाल पूछा, जिसने अंदर तक तोड़ दिया- क्या ऐसा पहले भी हुआ था? मेरे पास शब्द नहीं थे। हालांकि जज ने वकील को ऐसे असंवेदनशील सवाल के लिए डांटा।
पीड़ित परिवार को ताने और उपेक्षा भी झेलनी पड़ी। पीडि़ता के पिता ने कहा, ऐसा लगता था जैसे हमने ही गुनाह किया हो। गवाह बनने को तैयार लोग भी डर से पीछे हट गए। पीडि़ता अफसर बनना चाहती है, कहती है कि मैं दूसरी महिलाओं की आवाज बन सकूं।
पॉक्सो एक्ट की धारा-35 स्पष्ट रूप से निर्धारित करती है कि किसी भी मामले का विचारण घटना के एक वर्ष के भीतर पूर्ण किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुना जाना आवश्यक है, ताकि पीडि़ता को शीघ्र न्याय मिल सके। किसी भी वजह से न्याय में देरी पीडि़ता के मानसिक और भावनात्मक दर्द को बढ़ाती है। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
-सुषमा कैथल, अधिवक्ता
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा उपलब्ध रिपोर्ट खुलासा करती है कि देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध तेजी से बढ़े हैं।
वर्ष 2022 में कुल 4,45,256 मामले दर्ज हुए। यह डेटा 2021 और 2020 की तुलना में गंभीर बढ़ोतरी को दर्शाता है।
देश में 2022 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की दर (हर एक लाख की आबादी पर अपराधों की संख्या) का औसत 66.4 फीसद था, जबकि आरोप-पत्र दाखिल करने की दर 75.8 रही।
दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सबसे ऊंची दर 144.4 दर्ज की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 65,743 एफआइआर दर्ज हुईं।
वहीं मध्यप्रदेश की दर भी औसत से ज्यादा 78.8 रही।
महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर पत्रिका ने महासर्वे से पहल कर दी है। अब आपको साथ जुडऩा है। मिलकर आवाज उठाएंगे तो समाधान की दिशा में और सकारात्मक नतीजे आएंगे।
आप इस अभियान से इस तरह जुड़ें- हमें बताएं अपने अनुभव या समस्याएं रिपोर्ट करें।
अपराधों में कमी के लिए आपके प्रयासों, कार्यक्रमों की जानकारी स्थानीय पत्रिका कार्यालय में बताएं
टॉक शो स्कूल-कॉलेज व कोचिंग संस्थानों में छात्राओं को सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। पत्रिका माध्यम बनेगा।
पुलिस के साथ संवाद संवेदनशीलता व सतर्कता बढ़ाने के लिए थाना स्तर पर संयुक्त कार्यक्रम करें पत्रिका माध्यम बनेगा।
भागीदारी समाज, संगठन, संस्थाएं, इंफ्लुएंसर्स: आपके प्रयासों और सुझावों की भूमिका सबसे अहम है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में कमी के लिए आगे आइए और जुड़िए। पत्रिका आपको मंच देगा।
Updated on:
04 Feb 2025 03:07 pm
Published on:
03 Feb 2025 10:54 am

बड़ी खबरें
View Allशहडोल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
