6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दगना : मां, दादा व पड़ोसी दाई पर एफआइआर, बाल आयोग ने भी अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट

क्रूरता: अंधविश्वास के फेर में दो माह के शिशु को 51 बार दागा था

2 min read
Google source verification
दगना : मां, दादा व पड़ोसी दाई पर एफआइआर, बाल आयोग ने भी अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट

दगना : मां, दादा व पड़ोसी दाई पर एफआइआर, बाल आयोग ने भी अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट

शहडोल. जिले के हरदी गांव में दो माह के शिशु को अंधविश्वास के फेर में 51 बार दागने के मामले में पुलिस ने मां, दादा और दागने वाली पड़ोसन दाई के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है। पुलिस ने थाना दाई बूटी बाई बैगा, मां बेलवती बैगा एवं दादा रजानी बैगा के विरूद्ध खिलाफ ड्रग एवं मैजिक रेमिडिस एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है। टीआई भूपेन्द्र मणि पांडेय के अनुसार, दो माह के शिशु को सांस लेने में परेशानी हो रही थी एवं पेट में सूजन थी। जिसे 5 नवंबर 23 को पड़ोस की बूटी बाई बैगा ने दाग दिया था। इस दौरान मां बेलवती बैगा व दादा रजानी बैगा का सहयोग था। पड़ोसन दाई ने बालक को बाव की बीमारी बताया था, जिस पर दादा ने दगवा दिया था। इस दौरान मां भी साथ थी और बच्चे को पकड़ी थी। दाई ने नुकीली वस्तु को गर्म कर बालक के शरीर को दाग दिया था। इधर बाल संरक्षण आयोग ने भी अधिकारियों से जवाब तलब किया है। गौरतलब है कि हरदी निवासी प्रेमलाल बैगा के डेढ़ माह के पुत्र प्रदीप बैगा को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उसका पेट भी फूल गया था। नजदीकी अस्पताल में कोई सुविधाएं न होने पर पड़ोस की एक महिला से अंधविश्वास के फेर में परिजनों ने दगवा दिया था। जन्म के वक्त भी दगवाया था। दूसरी बार फिर 51 बार दगवा दिया था।
आयोग का एसपी को पत्र, कहा- कार्रवाई से अवगत कराएं
मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एसपी को पत्र लिखा है। जिसमें कहा है कि प्रकरण की जांच कर की गई कार्रवाई के प्रतिवेदन से आयोग को अवगत कराएं।
झूठी रिपोर्ट पर चुप्पी, कलेक्टर ने कहा- जांच कराएंगे
दो माह के शिशु के साथ हुई क्रूरता के बाद अब अधिकारी विभाग की गलतियों पर पर्दा डाल रहे हैं। जांच के लिए गई अधिकारियों की टीम ने रिपोर्ट में झूठी जानकारी सीएमएचओ व अधिकारियों को दे दी थी। इतना ही नहीं, खुद की गलती छिपाने शिशु की मां को ही झूठा बना दिया था। पत्रिका की पड़ताल के बाद अब अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। कलेक्टर वंदना वैद्य का कहना है कि रिपोर्ट आते ही सत्यता की जांच कराएंगे। इधर, सीएमएचओ डॉ आरएस पांडेय का कहना है कि बीएमओ से तिथि बताने में गलती हुई है। बाल संरक्षण आयोग सदस्य मेघा पवार ने भी गंभीरता से लिया है, जांच कराने की बात कही है। जांच टीम का कहना था कि जिस दिन गांव में 25 अक्टूबर को टीकाकरण का सत्र था, उस वक्त गांव में महिला नहीं थी। वह शिशु को लेकर मायके चली गई थी। जबकि पिता का कहना है कि उसकी पत्नी गांव दशहरा के पहले 23 अक्टूबर को ही आ गई थी। अधिकारी गलत बता रहे हैं। परिजनों के बयान के बाद अब अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट में तिथि लिखने में गलती हो गई थी। इनका कहना है रिपोर्ट में गलत जानकारी दी है तो सत्यता की जांच कराएंगे। अभी मेरे पास रिपोर्ट नहीं आई है। वंदना वैद्य, कलेक्टर शहडोल