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इधर धरने पर वनकर्मी, उधर खतरे में वनराज, सक्रिय हुए वन माफिया

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Dharne par vankarmi, khatre men vanraaj

इधर धरने पर वनकर्मी, उधर खतरे में वनराज, सक्रिय हुए वन माफिया

शहडोल- प्रदेशभर में चल रहे वन कर्मियों के हड़ताल से हाहाकार मचा हुआ, संभाग में भी इसका असर साफ-साफ देखने को मिल रहा है, आज छठवां दिन है, जहां वन कर्मी अपनी 19 सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं, वन कर्मियों का साफ कहना है ये हड़ताल अनिश्चितकालीन है, जबतक उनकी सभी मांगों को मान नहीं लिया जाता है। वन कर्मियों के हड़ताल से जंगलों का, वहां रहने वाले वन्य प्राणियों का, क्या हाल हो रहा है, ये साफ-साफ दिख रहा है, वन संपदा का खासा नुकसान हो रहा है, वन्य प्राणियों की सुरक्षा खतरे में आ चुकी है, गर्मी का सीजन है, जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं।

खतरे में वन संपदा

वनविभाग का पूरा मैदानी अमला रेंजर से लेकर वनरक्षक तक हड़ताल पर हैं, ऐसे में जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था अब भगवान भरोसे है, वैसे भी वन संपदा पर वन माफियाओं की नजर हमेशा ही बनी रहती है, और अब जब वनकर्मी धरने पर बैठे हुए हैं, ऐसे में वन माफिया पूरी तरह से सक्रिय हो चुके हैं। वन माफिया पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। लेकिन अब उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।

जंगलों में आग का सबसे बड़ा संकट

वनकर्मी हड़ताल पर हैं, गर्मी का सीजन चल रहा है, टेंपरेचर 43-44 डिग्री तक पहुंच जा रहा है, गर्मी के इस मौसम में आग लगने की ज्यादा संभावना रहती है। जंगलों में आए दिन आगजनी की खबरें आ रही हैं। ऐसे में जंगलों में खतरा बढ़ गया है। अभी हाल ही में रविवार और सोमवार को घुनघुटी के मालाचुआ, गोहपारू के भदवाही केशवाही के रूपौला शहडोल के कल्याणपुर और रोजगार्डन में आगजनी की घटनाएं हुई हैं, जिसमें लाखों रुपए की क्षति होने का अनुमान लगाया गया है।

खतरे में वन्य प्राणियों की सुरक्षा व्यवस्था

शहडोल संभाग पिछले कुछ महीनों से सुर्खियों में इस बात को लेकर भी रहा कि यहां वन्य प्राणियों की बैक टू बैक मौत हुई, जिसमें ज्यादातर शिकार हुए। बाघ और तेंदुओं की बैक टू बैक मौत से पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा रहा। आए दिन कहीं न कहीं से किसी कारण से बाघ के मौत की खबर आ रही थी। ऐसे में अब जब पूरे वनकर्मी ही हड़ताल पर हैं, तो अब तो वन्य प्राणियों की जान और खतरे में हैं। वनराज की जान भी खतरे हैं। शिकारी वनकर्मियों के इस धरने का फायदा उठाने की जरूर सोचेंगे। वन माफिया पूरी तरह से सक्रिय हो चुके हैं।