
Doing amazing in TV serial by going to Mumbai from village
शहडोल- किसी ने सच ही कहा है जिसका टारगेट फिक्स होता है, रिस्क भी वही लेता है। एक छोटे से गांव का लड़का आज मुंबई में टीवी सीरियल में काम कर अपनी कलाकारी से एक अलग पहचान बना रहा है। लोग उसके किरदार को काफी पसंद कर रहे हैं। तो इसमें उसके पॉजिटिव नजरिये का एक अहम रोल है।
शहडोल जिले के ब्योहारी के बुढ़वा गांव के धरी नंबर-2 के रहने वाले रामकृष्ण सिंह बैस स्टार भारत के एक लीडिंग सीरियल शाम दाम दंड भेद में अपनी कलाकारी से लोगों को गुदगुदा रहे हैं। और लोग उनकी एङ्क्षक्टग को काफी पसंद भी कर रहे हैं।
बब्बन के किरदार में गुदगुदा रहे रामकृष्ण
शाम दाम दंड भेद नामक ये सीरियल नए चैनल स्टार भारत में रात 9 बजे से सोमवार से शुक्रवार तक चलता है। शकुंतलम टेलीफिल्म प्रोडक्शन के इस सीरियल को हेमंत प्रभु जी डायरेक्ट कर रहे हैं। जिसमें रामकृ ष्ण बब्बन के किरदार में लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। रामकृष्ण के मुताबिक धारावाहिक शाम दाम दंड भेद में भानु उदय और सोनल वेंगुरलकर की मुख्य भूमिका है।
संघर्ष के आगे जीत है
कहते हैं सफलता पाने के लिए संघर्ष तो करना ही पड़ता है। और एक गांव के लड़के के लिए मुंबई तक का सफर तय करना इतना भी आसान नहीं होता है। रामकृष्ण को भी यहां तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी है। टारगेट फिक्स था तो लगातार रिस्क भी लेते गए । और ईमानदारी से मेहनत भी की। रामकृष्ण ने शहडोल से ही बीसीए का कोर्स किया। और पैसा, नाम कमाने की चाहत के साथ इंदौर में हार्डवेयर नेटवर्किंग का कोर्स करने पहुंच गए। एडमिशन तो ले लिया लेकिन मन नहीं लग रहा था। तो वहीं एक डांस क्लास ज्वाइन कर लिया। वहां भी उनकी अपनी एक अलग ही स्टाइल थी। जिसे देखने के बाद वहीं डांस सिखाने वाली मैडम ने कहा की अगर तुम्हे अपने सपने पूरे करने है। तो एक्ंिटग की दुनिया में जाओ। थिएटर करो। और वहीं से बिना कुछ सोचे रामकृष्ण ने भोपाल का रास्ता पकड़ लिया। और वहां द राइजिंग सोसाइटी ऑफ आर्ट एंड कल्चर ग्रुप से जुड़ गए। जहां उन्होंने गुरु चंन्द्रहास तिवारी और प्रीति झा तिवारी से एक्टिंग की बारीकियां सीखीं। और फिर 2015 में मुंबई की ट्रेन पकड़ ली। और अब एक्टिंग की बारीकियों को सीखने के बाद मौके के लिए स्ट्रगल करते रहे और अब जब मौका मिला तो रामकृष्ण अपने शानदार एक्टिंग से लोगों को अपना दीवाना बना रहे हैं। रामकृष्ण के इस स्ट्रगल में उनके दोस्त सुमित पांडे और अभिनव मिश्रा ने भरपूर साथ दिया।
घर का मिला पूरा सपोर्ट
रामकृष्ण कहते हैं की अगर उन्होंने आज गांव से एक महानगर का रास्ता तय किया है। तो उनकी इस सफलता में उनके फैमिली का बड़ा योगदान है। उनके पिता रामसुशील बैस, जो खेती किसानी करते हैं। और उनके बड़े पिता भीसम सिंह बैस हमेशा ही उन्हें सपोर्ट करते रहे। और इसी वजह से आज वो इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं। रामकृष्ण कहते हैं की अभी तो ये शुरुआत है। अभी काफी लंबा सफर तय करना है।
Published on:
31 Oct 2017 06:27 pm
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