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ऐसा स्कूल जहां शिक्षक ही नहीं, ऐसे होगी बच्चों की पढ़ाई

मॉडल स्कूल की व्यवस्थाएं पटरी से उतरीं

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ऐसा स्कूल जहां शिक्षक ही नहीं, ऐसे होगी बच्चों की पढ़ाई

शहडोल- सरकारी स्कूलों के इन्हीं हालातों की वजह इन स्कूलों में स्टुडेंट एडमिशन लेने से कतराते हैं, कहने को मॉडल स्कूल तैयार किया गया है, लेकिन जब स्कूल में शिक्षक ही नहीं रहेंगे, तो पढ़ाएगा कौन, क्या अतिथि शिक्षकों के भरोसे पूरे स्कूल को चलाया जा सकता है। और वैसे भी अतिथि शिक्षकों को फिर से नई नियुिक्त होगी, उसमें समय लगेगा, तबतक क्या स्कूल में एडमिशन लेने वाले बच्चे बिना शिक्षकों के ही पढ़ाई करेंगे, ये बड़ा सवाल है।

जनपद क्षेत्र बुढ़ार का मॉडल स्कूल भठिया शिक्षा का नया सत्र शुरू हो जाने के बाद भी शिक्षक विहीन है। यहां पदस्थ रहे वरिष्ठ अध्यापक पिछले दो साल से प्राचार्य का कार्य भार संभाल रहे थे। जिन्हें प्रवेशोत्सव के दिन स्कूल का ताला न खोलने पर निलंबित कर दिया गया है।

सोमवार को बुढ़ार संकुल में पदस्थ सीताराम दुबे को नए प्रचार्य का उत्तर दायित्व सौपा गया है। लेकिन मॉडल स्कूल में छात्रों को पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक की पदस्थापना नहीं है। जिससे मॉडल स्कूल में पढऩे वाले छात्र- छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

बुढ़ार जनपद का यह मॉडल स्कूल शुरू से ही विवादो के घेरे में रहा। जनपद मुख्यालय में खुलने वाले इस मॉडल स्कूल को 30 किलोमीटर दूर ग्रामीण क्षेत्र भठिया में खोला गया। जहां पढऩे के लिए न पर्याप्त छात्र हैं और न पढ़ाने के लिए शिक्षक। दो वर्षो से यह विद्यालय भगवान भरोसे चल रहा है।

पिछले शैक्षणिक सत्र में कक्षा 9वीं,10वीं,11वीं और 12वीं में मात्र 54 छात्र अध्यनरत थे। पढ़ाने के लिए एक स्थायी वरिष्ट अध्यापक की नियुक्ति थी। उनके पास भी प्राचार्य का प्रभार था। इतना ही नहीं वो भी 40 किलोमीटर दूर से अप-डाउन करके नौकरी करते थे। बाकी 11 अतिथि शिक्षक की नियुक्ति कर शिक्षण कार्य करवाया जा रहा था। लेकिन पिछला शिक्षा का सत्र समाप्त होने के साथ ही सभी अतिथि शिक्षको की सेवा समाप्त हो चुकी है। नए शिक्षा सत्र में नए शिरे से फिर अतिथि शिक्षको की भर्ती होगी तब शिक्षण कार्य शुरू हो सकेगा।

मॉडल स्कूल का नाम सुनते ही अभिभावको के मन में शिक्षा की एक नई तस्वीर उभर कर आ जाती है। लेकिन मॉडल स्कूल भठिया से क्षेत्र के छात्र-छात्राएं शुरू से ही दूरी बनाए हुए हैं। जिसकी वजह स्थायी शिक्षकों की पदस्थापना न होना है। लेकिन जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जिसका खामियाजा क्षेत्र के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को भोगना पड़ रहा है।