
शहडोल (शिवमंगल सिंह). चुनावी धारावाहिक में अभी रिश्तों को कसौटी पर कसा जा रहा है। टिकट की दौड़ में पिता-पुत्र, भाई-भाई, पति-पत्नी, भाई-बहन भी शामिल हैं। कई तो एक ही सीट पर और एक ही पार्टी से दावेदारी कर रहे हैं तो कई रिश्तेदार अलग-अलग सीट पर और अलग-अलग पार्टियों से दावेदारी ठोंक रहे हैं। इस रोचक मुकाबले में लोगों की भी नजरें लगीं हुई हैं। पार्टियां भी रिश्तेदारों की दावेदारी से पशोपेश में हैं। हालांकि माना ये भी जा रहा है कि अपने रिश्तेदारों की सीट बचाने के लिए भी कुछ लोग दावेदारी कर रहे हैं, जिससे दूसरे की दावेदारी कमजोर हो। जिन सीटों पर रिश्तेदार अलग-अलग पार्टी से टिकट मांग रहे हैं, वहां पर लोगों की रुचि अधिक है। अब इस मामले में टिकट बंटवारे के बाद ही पता चलेगा किसने रिश्तों की कीम चुकाई और किसने कीमत वसूली।
बांधवगढ़ सीट : पिता-पुत्र एक ही सीट पर भाजपा से मांग रहे टिकट
उमरिया जिले की बांधवगढ़ सीट से पिता-पुत्र भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। शहडोल से सांसद ज्ञान सिंह और उनके बेटे शिवनारायण सिंह विधायक का चुनाव लडऩा चाह रहे हैं। शहडोल सांसद दलपत सिंह परस्ते के निधन के बाद शहडोल से ज्ञान सिंह उपचुनाव में सांसदी का चुनाव जीत गए थे। उस दौरान वे बांधवगढ़ से विधायक थे। उनके सीट खाली करने पर वहां से उनके बेटे शिवनारायण सिंह ने विधानसभा के उपचुनाव में जीत हासिल की थी। अब ज्ञान सिंह सांसदी छोड़कर फिर से विधानसभा जाना चाह रहे हैं। इसके चलते पिता-पुत्र दोनों ही भाजपा से टिकट मांग रहे हैं।
पुष्पराजगढ़ : पति-पत्नी एक सीट से दावेदार, पार्टियां अलग
अनूपपुर जिले की पुष्पराजगढ़ सीट पर एक रोचक मुकाबला है। यहां से पति-पत्नी दोनों ही टिकट की दावेदारी ठोंक रहे हैं लेकिन दोनों की पार्टी अलग-अलग है। पूर्व मंत्री दलवीर सिंह की बेटी हिमाद्रि सिंह पुष्पराजगढ़ से कांग्रेस से टिकट मांग रहीं हैं, दूसरी तरफ उनके पति अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नरेंद्र मरावी भाजपा से दावेदारी कर रहे हैं। ये दोनों एक-एक बार लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। दोनों लोगों को हार का सामना करना पड़ा था। उधर नरेंद्र मरावी शहडोल की जयसिंहनगर सीट से टिकट मांग रहे हैं। उधर कांग्रेस के कई नेता हिमाद्रि को जयसिंहनगर सीट से चुनाव लड़वाना चाह रहे हैं।
मंडला : भाई-भाई और दामाद की भाजपा से दावेदारी
मं डला जिले में भाजपा से भाई-भाई तो दावेदारी कर ही रहे हैं, साथ में दामाद भी टिकट की लाइन में हैं। ऐसी चर्चा है कि मंडला से सांसद फग्गन सिंह भी दावेदारी कर रहे हैं। दूसरी तरफ निवास से उनके छोटे भाई रामप्यारे कुलस्ते विधायक हैं। वे निवास विधानसभा क्षेत्र से फिर से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। इसके अलावा फग्गन सिंह कुलस्ते के दामाद संजय कुशराम भी बिछिया विधानसभा क्षेत्र से दावेदारी कर रहे हैं। संजय कुशराम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी भी रहे हैं।
रीवा : भाई-बहन और भतीजा टिकट की दौड़ में
री वा से ही एक और दिग्गज परिवार के कई रिश्तेदार टिकट की दौड़ में शामिल हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के बेटे और गुढ़ से विधायक सुंदरलाल तिवारी तो टिकट की दावेदारी कर ही रहे हैं, उनके भतीजे डॉ. विवेक तिवारी सिरमौर विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। विवेक तिवारी पिछला चुनाव भी लड़े थे लेकिन उन्हें दिव्यराज सिंह के सामने हार का सामना करना पड़ा था। इसी तरह सुंदरलाल तिवारी की चचेरी बहन कविता पाण्डे भी रीवा विधानसभा सीट से चुनाव लडऩा चाह रहीं हैं। कविता एक बार नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ चुकीं हैं लेकिन उन्हें ममता गुप्ता के सामने हार का सामना करना पड़ा था।
रीवा : पिता-पुत्र अलग-अलग पार्टी से कर रहे टिकट के लिए दावेदारी
री वा जिले में भी रिश्तेदारों में टिकट की होड़ लगी हुई है। रीवा राजघराने से पिता-पुत्र दोनों टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह ने कांग्रेस में दोबारा वापसी की है। इसके बाद वे कांग्रेस से टिकट चाह रहे हैं। उधर उनके बेटे दिव्यराज सिंह सिरमौर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से विधायक हैं। वे भाजपा से सिरमौर विधानसभा सीट से दावेदारी कर
रहे हैं।
रीवा : एक भाई मंत्री, दूसरा कांग्रेस से मांग रहा टिकट
रीवा विधानसभा सीट से विधायक और मंत्री राजेंद्र शुक्ला के भाई भी टिकट की रेस में हैं। विनोद शुक्ला कांग्रेस से रीवा जिले की देवतालाब विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। विनोद शुक्ला पिछले विधानसभा चुनाव में भी मऊगंज से अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। तब वे निर्दलीय चुनाव लड़े थे।
Published on:
13 Oct 2018 11:20 am
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