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शुभम बघेल
शहडोल. आदिवासी अंचल शहडोल के गोहपारू देवरी गांव में रहने वाले काष्ठ शिल्पकार बिहारी साहू की देशभर में पहचान है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के संदेश के साथ 44 पन्नों की वुडेन बुक को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। वुडेन बुक गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल करने की प्रक्रिया के लिए दिल्ली भेजी गई है। प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ शिल्पी का अवार्ड भी मिल चुका है लेकिन वन विभाग के अफसरों ने इनकी कलाकारी ही जब्त कर ली है। अब हालात कुछ ऐसे हैं कि मध्यप्रदेश सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को वर्ल्ड रिकॉर्ड तक पहुंचाने की कोशिश करने वाला ये शिल्पकार औजार जब्त होने से दर-दर भटकने के लिए मजबूर है। वन विभाग के अफसरों ने दो साल पहले कलाकारी से जुड़े सभी औजारों को जब्त कर लिया था, जुर्माना भी लगाया और अब औजार भी वापस नहीं कर रहे हैं। बिहारी लाल कहते हैं, अफसरों ने पंजीयन का नवीनीकरण न होना बताकर औजार जब्त कर लिया था। जबकि विभाग में लाइसेंस नवीनीकरण के लिए मैनुअली कई बार आवेदन दिया था लेकिन अधिकारियों ने नहीं किया था। औजार वापस करने दो साल से सीसीएफ से लेकर डीएफओ व रेंज कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
4 बार छापा मारा, कुछ नहीं मिला, फिर नवीनीकरण बताई वजह
बिहारी साहू के अनुसार, गोहपारू रेंज के अधिकारियों ने 4 बार छापा मारा लेकिन कुछ नहीं मिला। जिसके बाद लाइसेंस नवीनीकरण न होना बताकर औजार जब्त कर लिया था। जबकि कई बार नवीनीकरण का आवेदन दिया था, जिसकी पावती भी दी थी। औजार जब्त करने के साथ 26 हजार जुर्माना भी मांग रहे थे। औजार जब्त करने से पूरा परिवार दर-दर भटकने मजबूर हो गया है। 35 वर्ष से काम कर रहे बिहारी बताते हैं, स्थानीय अधिकारी अक्सर परेशान करते थे। पूर्व में सत्यापन भी गलत करके दे दिया था। बाद में कला देखते हुए डीएफओ ने सत्यापन खुद से करके अनुमति दी थी। जिसके बाद से स्थानीय अधिकारियों में इसी बात से नाराजगी थी और कहते थे अधिकारियों से शिकायत करते हो। उन्होंने ये भी बताया कि पिछले दो साल से चक्कर काट रहे हैं। सीसीएफ से लेकर डीएफओ और वन विभाग के अधिकारियों से मिन्नतें कर चुके हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। पूर्व में सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की थी कि अधिकारियों ने बिना वजह औजार जब्त कर अब वापस नहीं कर रहे हैं। जिसके बाद गोहपारू रेंज के अधिकारियों ने कार्यालय बुलाया और औजार वापस देने की बात कहकर शिकायत वापस करने का दबाव बनाया। शिकायत वापस लेने के बाद अब तक औजार अधिकारियों ने नहीं दिया है।
शिक्षक थे, नौकरी छोड़ विरासत को आगे बढ़ाया
काष्ठ शिल्पकार बिहारी लाल साहू का 20 साल की उम्र में सरकारी शिक्षक के लिए चयन हो गया था। पूर्व में शिक्षक भी थे लेकिन परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पुस्तैनी काम को ही आगे बढ़ाना जरूरी समझा और नौकरी छोड़ दी। बिहारी लाल साहू बताते हैं कि पिछले 35 साल से काष्ठ शिल्प कर रहे हैं। बचपन में ही पिता से यह काम सीखा था और अब देशभर में अलग पहचान बना चुके हैं। बिहारी लाल काष्ठ शिल्प में लगातार नवाचार करते हैं। हाल ही में वुडेन बुक को लेकर चर्चा में भी रह चुके हैं। बिहारी साहू के अनुसार, प्रदेश में बेहतर काष्ठशिल्प होने पर मप्र हस्तशिल्प विकास निगम ने घर में वर्कशाप भी बनवाई है। पूर्व में यहां पर खुद काम करने के साथ दूसरों को भी सिखाने का काम करते थे। बिहारी साहू लकड़ियों में नक्काशी में माहिर हैं। देखते ही देखते लकड़ी पर चेहरा भी हुबहू उतार देते हैं। वो पूर्व में बेटी बचाओ पर वुडेन बुक तैयार कर चर्चा में रह चुके हैं। उन्होंने वुडन बुक बनाई है, जिसमें 44 पन्ने हैं। बताया गया कि इस वुडेन बुक को दिल्ली भी भेजा गया था। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल करने के लिए प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। बताया गया कि लकड़ी की इस किताब में 44 पन्ने हैं। इसके पूर्व इस तरह की किताब किसी ने नहीं लिखी है। वुडेन बुक में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के साथ जल संरक्षण और कई महत्वपूर्ण संदेश लिखने के साथ नक्काशी है।
Published on:
20 Oct 2022 07:40 pm
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