
यहां है आदि कालीन पत्थरों के औजारों के साथ 80-90 लाख वर्ष पुराने फॉसिल्स का दुर्लभ संग्रह
शहडोल. नगर के महात्मा गांधी स्टेडियम मार्ग में स्थित पुरातत्व संग्रहालय आकर्षण का केन्द्र हैं। यहां कई ऐतिहासिक प्रतिमाएं, फॉसिल्स, आदि मानव से जुड़ी हुए वस्तुएं मौजूद हैं। इनमें से कुछ ऐसी प्रतिमाएं व फॉसिल्स भी हैं जो बिरले की देखने मिलती है। इस पुरातत्व संग्रहालय की देखरेख व संरक्षण की दिशा में प्रयास हो तो इसे और भी व्यवस्थित कर और भी आकर्षित बनाया जा सकता है। विडंबना यह है संग्रहालय को लेकर अभी भी प्रशासन व पर्यटन विभाग गंभीर नहीं है। शायद यही वजह है कि यह अभी तक पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाया। इसकी देखरेख व संरक्षण को लेकर भी कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। जिसके चलते यह संग्रहालय उपेक्षा का शिकार है।
फॉसिल्स व पत्थर के औजारों का संग्रह
संग्रहालय में जहां 80-90 लाख वर्ष पुराने फॉसिल्स बड़ी आसानी से देखने मिल जाते हैं। वहीं आदि मानव जिन पत्थरों के औजारों का उपयोग करते थे उनका भी पूरा संग्रह पुरातत्व संग्रहालय में मौजूद है। इसके अलावा 8वीं सदी से 11 वीं सदी के बीच कई कई प्रतिमाएं सहित प्राचीन मुद्राएं, सिलालेख यहां की शोभा बढ़ा रहे हैं।
जर्जर हो रहा भवन, जानकारी देने वाला भी कोई नहीं
संग्रहालय का पुराना भवन जर्जर होने लगा है। दीवारों में दरारे पड़ गई हैं। जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने लगा हैं। जिसका समय पर मरम्मत कार्य नहीं हुआ तो पूरा भवन जर्जर हो जाएगा। इसके अलावा यहां आने जाने वाले लोगों को यहां मौजूद संग्रह के विषय में जानकारी देने वाला भी कोई नहीं है। ऐसे में जो लोग आते भी हैं जो उन्हे समुचित जानकारी नहीं मिल पाती है और महज घूमकर वह चले जाते हैं। ऐसे में पुरातत्व के जानकार की भी आवश्यकता महसूस की जा रही है।
कुबेर, योगिनी व सरस्वती की अद्भुत प्रतिमा
पुरातत्व संग्रहालय में प्राचीन व बिरले मिलने वाली प्रतिमाओं का संग्रह है। यहां धन के देवता कहे जाने वाले भगवान कुबेर की अति प्राचीन प्रतिमा भी मौजूद हैं। जानकारों की माने तो भगवान कुबेर की प्रतिमा बिरले ही देखने मिलती है। इसके अलावा योगिनी, मां सरस्वती की तंत्र साधना से संबंधित प्रतिमा, मां लक्ष्मी के साथ ही अन्य प्राचीन प्रतिमाएं मौजूद हैं जो कि बिरले ही देखने मिलती है।
इनका कहना है
पुरातत्व संग्रहालय के कायाकल्प को लेकर प्रयास किया जा रहा है। बाउण्ड्रीवाल का निर्माण कार्य कराया गया है। एक अन्य भवन में भी कार्य हो रहा है।
एसएस परिहार, पर्यटन प्रभारी
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पुरातत्व संग्रहालय में कई ऐसी प्राचीन प्रतिमाएं उपलब्ध हैं जो बिरले ही देखने मिलती हैं। आदि मानव के औजार व 80-90 लाख वर्ष पुराने फॉसिल्स भी मौजूद हैं।
आरएस परमार, पुरातत्ववेत्ता, शहडोल
Published on:
09 Jan 2023 12:13 pm
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