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ज्वाइन्ट सेके्रटरी ने दिए टिप्स, किस तरह ले सकते हैं यूजीसी से अधिक धन

विवि में अनुदान आयोग की भूमिका एवं संभावना पर कार्यशाला का आयोजन

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ज्वाइन्ट सेके्रटरी ने दिए टिप्स, किस तरह ले सकते हैं यूजीसी से अधिक धन

शहडोल। कॉलेज और विश्वविद्यालयों की हमेशा से शिकायत रहती है कि उन्हें यूजीसी से उतना अनुदान नहीं मिल सका है जितने के वे हकदार हैं। प्रबंधन को अकसर ये भी कहते सुना जाता है कि उनकी अपेक्षा दूसरे संस्थानों को यूजीसी ने अधिक अनुदान और धन मुहैया कराया है। इन्हीं सब शिकायतों को दूर करने के लिए यूजीसी के ही एक अधिकारी ने टिप्स दिए कि वे कैसे यूजीसी (विश्वविद्यालय) अनुदान आयोग से कैसे अधिक से अधिक ले सकते हैं और अपने संस्थान को तरक्की के रास्ते पर ले जा सकते हैं।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की भूमिका एवं संभावनाएं विषय पर स्थानीय पं. शंभूनाथ शुक्ल आडिटोरियम के सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल यूजीसी के ज्वाइन्ट सेके्रटरी डा. जी एस चौहान की उपस्थिति में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में डा. मुकेश तिवारी कुलपति पं. शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय शहडोल, कुल सचिव डा. विनय सिंह, डा. के कुमार के अलावा संभाग भर में संचालित महाविद्यालयों में प्राचार्य उपस्थित रहे। कार्यशाला का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों का पुष्प गुच्छ से स्वागत किया गया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में मुख्य अतिथि डा. जी एस चौहान ने कार्यशाला में उपस्थित महाविद्यालय के प्राचार्यों को विवि अनुदान आयोग के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर उनके द्वारा बताया गया कि महाविद्यालय में विकास कार्यों के लिए विवि अनुदान आयोग से किस-किस मद से फंड मिलता है। यह फंड कैसे मिल सकता है इसके लिए क्या-क्या करना होगा साथ ही ग्रान्ट फंड के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की। कार्यशाला में श्री चौहान द्वारा संभाग के अलग-अलग महाविद्यालय के प्राचार्यों को आवश्यक सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों को धन मुहैया कराने के लिए यूजीसी ने कुछ मापदण्ड तय किए हैं। कॉलेज यदि उन मापदण्डों को पूरा करते हैं तो निश्चित रूप से उन्हें अधिक फंड मिलने की संभावना रहती है। इसके अलावा संस्थानों की जरूरतों, उनकी योजना, उनका शैक्षणिक स्तर, ट्रैक रिकॉर्ड, प्रजेन्टेशन आदि मायने रखता है।