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एनेस्थीसिया प्रतिस्पर्धा में डा. रुतिका ने अर्जित किया गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मान

नगर का किया नाम रोशन
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शहडोल

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raghuvansh prasad mishra

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Updated: 11 Sep 2018, 8:30 PM IST

 In the anesthesia competition, Dr. Ruthika has earned gold medal, honor given by the citation.

एनेस्थीसिया प्रतिस्पर्धा में डा. रुतिका ने अर्जित किया गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मान

एनेस्थीसिया प्रतिस्पर्धा में डा. रुतिका ने अर्जित किया गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मान

बुढ़ार. डा. एमटी भाठिया गोल्डमेडल एनेस्थीसिया प्रतिस्पर्धा में डा. रुतिका भगत ने गोल्ड मेडल अर्जित कर नगर का नाम रोशन किया है।नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी पीके भगत की पुत्री डा. रुतिका भगत अरविन्दों कॉलेज इंदौर में अध्ययन है। उन्होंने एनेस्थीसिया (निश्चेतना) विषय पर आयोजित प्रतिस्पर्धा 2018 आईएसएसी ओएन(स्कान) के उज्जैन में आयोजित 32 वें अधिवेशन में सम्मलित होकर शोधपत्र प्रस्तुत किया जिस पर सफलता अर्जित किया है। होनहार छात्रा डा. रुतिका भगत को आयोजित कार्यक्रम के मध्य 9 सितम्बर को डा. एसएन अग्रवाल (गांधी मेडिकल कॉलेज) भोपाल के उपस्थिति में डा. वेक्टगिरी केएम सचिव ने गोल्डमेडल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्माननित किया।
डा. रुतिका भगत को मिली इस सफलता पर विधायक जयसिंह मरावी, पूर्व विधायक छोटेलाल सरावगी, समाजसेवी हनुमान खण्डेलवाल,नगरपरिषद अध्यक्ष कैलाश विश्नानी, उपाध्यक्ष पुष्पेन्द्र ताम्रकार ने प्रशनता व्यक्त की है।
मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं स्थापित मनाए गणेश पर्व
. कलेक्टर अनुभा श्रीवास्तव ने 13 सितम्बर को गणेश चतुर्दशी के अवसर पर जनसामान्य से मिट्टी से बनी इकोफ्रेंडली गणेश जी की प्रतिमाओं की स्थापना करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ पर्यावरण के लिये जरूरी है कि हमारे जलस्रोत निर्मल बने रहें और इसके लिए सभी लोग मिट्टी की प्रतिमाओं की ही स्थापना करें ताकि पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान न हो।
कलेक्टर ने कहा कि मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं स्थापित कर हमें पर्यावरण, नदी-तालाबों तथा जलीय जीव-जन्तुओं की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मिट्टी से बनी प्रतिमाएं जलस्रोतों के पानी में अच्छी तरह से घुल जाती हैं और इनका किसी तरह का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है। यह नदी-तालाब की तलछट को प्रदूषित भी नहीं करती।
उन्होंने कहा कि प्राय: घरों में स्थापित की जाने वाली मूर्तियाँ पीओपी और रासायनिक रंगों से बनी होती हैं, जो विसर्जन पर पर्यावरण समस्याओं को जन्म देती हैं। पीओपी की परत जलस्रोतों की तली में जाकर सीमेंट की तरह जम जाती है और पानी को रिसने से रोक देता है। पीओपी की प्रतिमा पर हानिकारक रासायनिक रंग लगाए जाते हैं, ये जब पानी में घुलते हैं तो इनके विशाक्त प्रभाव से पानी में रहने वाले जलीय जन्तुओं और मछलियों के लिये घातक असर छोड़ते हैं। इससे हमारी नदियाँ, तालाब और अन्य जलस्रोत भी प्रदूषित होते हैं और उनका पानी उपयोग के लायक नहीं रह जाता है।