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जिले में इसकी खेती को लगा झटका, रकबा भी घटा

अनाज की बजाय दलहन का बढ़ा रकबा...

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Its cultivation in the district is a shock acreage also decreased

Its cultivation in the district is a shock acreage also decreased

शहडोल. कम वर्षा की वजह से शहडोल जिले में गेहूं की खेती को झटका लगेगा। सिंचाई के पर्याप्त साधन न होने की वजह से किसान गेहूं की बुवाई के लिए परेशान हो रहे हैं। उधर कृषि विभाग ने अपना दामन बचाने के लिए गेहूं के रकबे को घटाकर दलहनी फसलों का रकबा बढ़ा दिया है। रबी की बोनी में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कृषि विभाग ने अनाज की बजाय दलहन फसलों की बोनी को ज्यादा तवज्जो दी है।

अनाज में गेहूं की बोनी का जो रकबा है उसके क्षेत्रफल में लगभग आधा क्षेत्रफल असिंचित क्षेत्रफल में आता है ऐसे में किसानों को गेहूं की बोनी के लिए निर्धारित रकबे की बोनी में भी परेशानी हो रही है।

बोनी के आंकड़े कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ो की माने तो गत् वर्ष अनाज के लिये 40 हजार 180 हेक्टेयर व दलहन के लिये 22 हजार 350 हेक्टेयर क्षेत्रफल बोनी के लिये आरक्षित किया गया था। जबकि इस

वर्ष ठीक इसके विपरीत बोनी का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2017 में जहां अनाज के लिये महज 25 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया हैं वहीं दलहन के लिये ३४ हजार ४५० हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोनी का लक्ष्य तय किया गया है जो कि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 हजार हेक्टेयर ज्यादा है।

कैसे होगी गेहूं की बोनी ?
जिले में बोनी के लिये निर्धारित कुल लक्ष्य में से लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल गेहूं की बोनी के लिये निर्धारित किया गया है। गेहूं की बोनी के लिए यह जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है वह अल्प वर्षा के चलते

पहले से ही सूखा पड़ा है। वहीं इसमें से 12 हजार 425 हेक्टेयर क्षेत्रफल सिंचित भूमि है। शेष लगभग 10 हजार 575 हेक्टेयर क्षेत्रफल असिंचित रकवे में शामिल है। जहां कि सिंचाई के लिये किसी भी प्रकार के साधन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस क्षेत्र में इस वर्ष किसानों को बोनी के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों को जुटाने पड़ रहे संसाधन
जिले के असिंचित रकवे में बोनी के लिये किसानों को अच्छी खाशी मशक्कत करनी पड़ रही है। गेहूं बोनी के कुल क्षेत्रफल का लगभग ४० फीसदी क्षेत्र सिंचाई साधन विहीन है। ऐसे में इस क्षेत्र में बोनी के लिये कि सानों को स्वयं के संसाधनों की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इस क्षेत्र में न तो किसी भी प्रकार के बांध व नहर की व्यवस्था है और न ही कोई ऐसे संसाधन जिससे कि किसानों की इस असिंचित भूमि को सिंचित कर खेती का रकवा बढ़ाया जा सके। ऐसे स्थिति में उक्त भूमि को सिंचित करने के लिये किसानों को स्वयं के संसाधन की व्यवस्था करनी पड़ेगी। तभी जाकर कहीं यहां बोनी संभव हो पायेगी।