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जानिए चिल्लर क्यों बनी परेशानी, न बैंक ले रहे न व्यापारी

चिल्लर लेकर आने वाले ग्राहकों को लौटा रहे दुकानदार, बैंकों के रवैये ने हालात और बिगाड़े

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Know why the chillar trouble nor the bank taking the dealer

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शहडोल- बाजार में चिल्लर को लेकर आमजन परेशान है। व्यापारी चिल्लर को लेकर हेकड़ी दिखा रहे हैं, वे चिल्लर लेकर आने वाले ग्राहक को सामान देने से इनकार कर रहे हैं। दूसरी तरफ बैंकों के रवैये ने भी स्थिति को खराब कर दिया है। बैंक संसाधनों का हवाला देकर चिल्लर जमा करने से इनकार कर देते हैं। जनता को हो रही परेशानी को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह से बेखबर बना हुआ है।

कभी कमीशन देकर खुल्ले पैसे मांगने वाले दुकानदार अब उनको ही लेने से इनकार कर रहे हैं। चाय-पान से लेकर किराना और कपड़ा दुकानों में भी चिल्लर लेन-देन में विवाद की स्थिति बन रही है। इन हालात में स्थानीय बैंक और जिला प्रशासन की लापरवाही भी सामने आ रही है। बैंक व्यापारियों से चिल्लर जमा करने में आनाकानी कर रहीं हैं। प्रशासन भी कार्रवाई न करके अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। खुल्ले पैसों की भरमार को लेकर आम आदमी के अलावा छोटे-बड़े व्यापारी भी परेशानी झेल रहे हैं।

शहर में प्रतिदिन छोटे-बड़े व्यापारियों के यहां ५०० से लेकर २ हजार रुपए की चिल्लर आती है। एक चेन के रूप में चिल्लर छोटे से बड़े व्यापारी होते हुए बैंक तक पहुंचती थी। बैंकें अपनी सहूलियत के हिसाब से खुल्ले पैसे जमा करने में आनाकानी करने लगे हैं। अब यह सिक्के छोटे और बड़े व्यापारियेां के यहां धीरे-धीरे जमा हो गए हैं। जिससे वे चिल्लर लेने से साफ मना करने लगे हैं।

इन्हें चिल्लर गिनने का समय नहीं
चिल्लर की समस्या को लेकर जब हम शहर के सेंट्रल बैंक और एसबीआई शाखा में चिल्लर जमा कराने के बहाने बैंक पहुंचे और कैशियर से 2 हजार की चिल्लर जमा करने का आग्रह किया तो बैंक कर्मचारियों ने चिल्लर लेने से इनकार कर दिया। तर्क दिया गया कि बैंक में सिक्के लेने के लिए कोई मशीन तो नहीं आई है, सिक्के गिनने मेें बैंक कर्मचारियों का समय बर्बाद होता है।

बड़े व्यापारी अपनी परेशानी बताकर चिल्लर लेने से मना कर देते हैं
किराना दुकान के मालिक कुक्कु मेहानी कहते हैं दुकान में लगातार सिक्के आते जा रहे हैं। बड़े व्यापारी अपनी परेशानी बताकर चिल्लर लेने से मना कर देते हैं। अब हालात यह हैं कि हजारों की चिल्लर एकत्रित हो गई है।

बैंक व्यापारियों से चिल्लर नहीं लेती
किराना व्यापारी कामेश उत्तवानी कहते हैं दो से ढाई हजार की चिल्लर दुकान में प्रतिदिन आ रही है। बैंक व्यापारियों से चिल्लर नहीं लेती जिस कारण बड़े व्यापारी भी हमसे सिक्के लेने में हिचकिचाते हैं।

सिक्कों की बाजार में भरमार है
किराना व्यापारी सुनील छाबड़ा कहते हैं कि सिक्कों की बाजार में भरमार है। बड़े व्यापारियों को हम सिक्के ही देते हैं। व्यवहार के कारण हमें ज्यादा परेशानियां नहीं हैं। फिर भी व्यवहारिक समस्याएं तो लगातार बनी हुई हैं।

लोगों में गलत मैसेज चला गया है कि सिक्के बंद हो गए
शहर के जनरल और बुक स्टोर संचालक प्रकाश गुप्ता कहते हैं लोगों में यह गलत संदेश चला गया है कि चिल्लर बंद हो गई है, अब लोग भी एक-दो के सिक्के लेने से मना कर देते हैं। प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि स्थिति सामान्य हो।

ये भारतीय मुद्रा का अपमान है
एडिशनल कलेक्टर सरोधन सिंह ने कहा ये भारतीय मुद्रा का अपमान है। यदि ऐसी कोई भी शिकायत मेरे पास आती है तो चाहे वो बैंक हो या व्यापारी कार्रवाई की जाएगी।

इनका कहना है
एसबीआई के चीफ मैनेजर के मुताबिक हमारे पास सिक्के जमा करने की कोई मशीन नहीं है। बैंक में मौजूद एटीएम मशीन से सिक्के दे तो सकते हैं लेकिन उस मशीन से सिक्के जमा नहीं हो पाते हैं। सिक्के आरबीआई से वैध हैं। लेन-देन में कोई दिक्कत नहीं है।