
शहडोल- सफलता कभी भी और किसी क्षेत्र में हासिल की जा सकती है। बस पूरे मन से मेहनत और प्रयास करने की जरूरत होती है। कुछ ऐसी ही कहानी है शहडोल जिले के जयसिंहनगर विकास खंड के ग्राम कतिरा के किसान पुष्पांजलि सिंह का। पहले पुष्पांजलि सिंह एक आम किसान के तौर पर ही जाने जाते थे, कुछ उत्पादन हो गया हो तो हो गया, खेती का मौसम आया खेत में बीज डाल दिया जो मिल गया वो मिल गया। लेकिन पुष्पांजलि सिंह ने जब थोड़ा प्रयास किया, थोड़ी मेहनत की तो आज उनकी पहचान जिले के उन्नत कृषक के तौर पर होने लगी है।
ऐसे लखपति बना किसान
पुष्पांजलि सिंह आज अपने पुराने खेत में ही, उतने ही जमीन में खेती कर लाखों रुपए कमा रहे हैं। बस बदला है तो सिर्फ खेती करने के अपने तरीके को, किसान पुष्पांजलि सिंह के मुताबिक पहले वो धान की बोनी बीज छिटकाव पद्धति से करते थे। जिससे धान का ज्यादा उत्पादन नहीं हो पाता था। उन्होंने बताया कि वो लगातार कृषि विभाग के अधिकारियों के संपर्क में रहकर कृषि वैज्ञानिकों से धान की श्री पद्धति से जैविक खेती के संबंध में ट्रेनिंग ली। किसान पुष्पांजलि सिंह के मुताबिक उन्होंने कृषि उपसंचालक जेएस पेंन्द्राम खुद गांव में जाकर उन्हें श्री पद्धति से जैविक खेती करने की तकनीक के बारे में जानकारी दी। जिसका असर ये हुआ कि आज वो प्रति एकड़ लगभग 35 से 40 क्विंटल धान का उत्पादन उसी खेत से ले रहे हैं। जिस खेत से पहले उत्पादन ना के बराबर होता था।
उन्होने बताया कि श्री पद्धति से धान की जैविक खेती के लिये आत्मा परियोजना द्वारा उन्नत बीज उपलब्ध कराया जा रहा है और नर्सरी भी तैयार कराई जा रही है। जैविक खेती में रासायनिक खाद का उपयोग नहीं किया जाता है बल्कि सड़ी हुई गोबर खाद मिलाकर नर्सरी पर छिड़काव किया जाता है। श्री पद्धति से जैविक खेती करने पर बालियों की संख्या ज्यादा होती है पानी की बहुत कम आवश्यकता पड़ती है खरपतवार आसानी से निकल जाते हैं तथा कम समय में जल्दी रोपाई हो जाती है। पिछले साल किसान श्री पद्धति और जैविक खेती से प्रति एकड़ लगभग 30 से 35 क्विंटल धान का उत्पादन लिया था। इस वर्ष लगभग 40 क्विंटल धान प्रति एकड़ होगा ऐसा अनुमान है।
खेत पाठशाला योजना का मिल रहा फायदा
किसान पुष्पांजलि सिंह के मुताबिक कृषि विभाग द्वारा संचालित खेत पाठशालाएं किसान पाठशाला योजना किसानों के लिये बेहतर साबित हो रही हैं, किसान पाठशाला योजना से किसानों को सीधे तकनीकी ज्ञान मिल रहा है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारी उन्हें उन्नत खेती के साथ साथ सब्जी उत्पादन आम नीम पपीता जैसे फलदार पौधे लगाने की समझाईस दी जा रही है वहीं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा उन्हें पशु पालन के लिये भी प्रेरित और प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसान श्री पुष्पांजलि सिंह ने बताया कि कृषि की आधुनिक तकनीक के कारण उन्होंने आधुनिक खेती के गुर सीखे हैं और अच्छा उत्पादन ले रहे हैं इससे उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है।
Published on:
17 Jan 2018 05:28 pm
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